-शीतल अवस्थी
दीपावली से पहले आने वाली चतुर्दशी पर शक्ति, हनुमान और शिव की उपासना का संयोग मनुष्य को भय, आलस्य और बुरी आदतों से संघर्ष करने का संदेश देता है।
७ नवंबर को काली चौदस, हनुमान पूजन और मासिक शिवरात्रि के अनुष्ठान होंगे। क्षेत्रीय परंपराओं में इस दिन माता काली, भगवान हनुमान अथवा भगवान शिव की आराधना की जाती है। तीनों उपासनाओं का साझा संदेश भय पर नियंत्रण और धर्म के लिए साहस है।
माता काली का उग्र स्वरूप बुराई के विनाश का प्रतीक है। हनुमानजी संयमित बल और निस्वार्थ सेवा के आदर्श हैं, जबकि भगवान शिव साधक को विषमताओं के बीच शांत रहने की शिक्षा देते हैं। पूजा में किसी व्यक्ति के अहित की कामना करने के बजाय अपने क्रोध, लोभ और भय के नाश का संकल्प लेना चाहिए।
संध्या में दीप जलाकर काली मंत्र ‘ॐ क्रीं कालिकायै नमः’, हनुमान चालीसा अथवा ‘ॐ नमः शिवाय’ का पाठ किया जा सकता है। योग्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना तांत्रिक प्रयोग और जोखिमपूर्ण अनुष्ठान नहीं करने चाहिए। किसी भी प्रकार की पशु हिंसा से दूर रहना चाहिए।
अंधविश्वास अथवा भय फैलाने वालों से सावधान रहना भी इस पर्व की आधुनिक शिक्षा है। सच्ची रक्षा विवेक, कानूनसम्मत आचरण, स्वास्थ्य संबंधी सावधानी और मजबूत सामाजिक संबंधों से प्राप्त होती है; पूजा उस आत्मबल को जागृत करती है।
धार्मिक मान्यताएं आस्था का विषय हैं; स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी मामलों में विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता दें।
