-क्या बारिश के आगे टिक पाएंगे मेट्रो के दावे?…बरसात में होगी एमएमआरडीए की असली परीक्षा
जेदवी / मुंबई
आगामी मानसून को देखते हुए मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) ने मेट्रो लाइन २ए, २बी, ७ और ९ पर सुरक्षा और संचालन को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हैं। प्राधिकरण का कहना है कि भारी बारिश और आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए इस बार मेट्रो नेटवर्क को अत्याधुनिक एआई तकनीक और हाईटेक निगरानी प्रणाली से लैस किया गया है, लेकिन अब इन दावों की असली परीक्षा मानसून के दौरान ही होगी।
एमएमआरडीए के अनुसार ३९ मेट्रो स्टेशनों पर २,४९६ सीसीटीवी वैâमरे सक्रिय किए गए हैं, जो स्टेशन परिसर और परिचालन क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे नजर रखेंगे। जलभराव से निपटने के लिए ३० आपातकालीन पंप तैनात किए गए हैं तथा ड्रेनेज सिस्टम और वायाडक्ट की सफाई कराई गई है। हालांकि मुंबई में हर साल होने वाली भारी बारिश के बीच यह व्यवस्था कितनी कारगर साबित होगी, इस पर यात्रियों की नजर रहेगी।
प्राधिकरण ने १,०७० इंसुलेटर, २५ केवी केबल, पैंटोग्राफ और ट्रांसफॉर्मर सहित महत्वपूर्ण विद्युत उपकरणों की जांच पूरी करने का दावा किया है। वहीं १४ स्टेशनों पर एनीमोमीटर भी लगाए गए हैं ताकि तेज हवाओं की निगरानी की जा सके। पहली बार एआई-सक्षम ऑटोमेटेड पैंटोग्राफ कंडीशन मॉनिटरिंग सिस्टम और एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स प्रणाली लागू की गई है। दावा है कि इससे तकनीकी खामियों, सुरक्षा उल्लंघनों और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल पहचान हो सकेगी। इसके बावजूद सवाल यही है कि क्या तकनीक के ये दावे मुंबई के चुनौतीपूर्ण मानसून के सामने खरे उतर पाएंगे।
एमएमआरडीए ने २५ मई से १५ अक्टूबर तक २४×७ आपदा नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय रखा है। अब मुंबईकरों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मानसून के दौरान मेट्रो सेवा वास्तव में कितनी निर्बाध और सुरक्षित रह पाती है।
बारिश में खुलेगी पोल
हर साल भारी बारिश से जूझने वाली मुंबई में इस बार मेट्रो व्यवस्था की कड़ी परीक्षा होगी। जलभराव, तेज हवाओं और तकनीकी चुनौतियों के बीच यात्रियों की नजर इस बात पर टिकी है कि एमएमआरडीए के हाईटेक दावे वास्तव में कितने कारगर साबित होते हैं।
