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वीडियो कांफ्रेंसिंग गवाही पर रोक लगाने को यूपी बार काउंसिल को अधिवक्ताओं ने लिखा पत्र

राजेश सरकार / प्रयागराज

जनपद न्यायालय के वकीलों ने उत्तर प्रदेश में पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए न्यायालय में गवाही पर रोक लगाने की मांग की है। यह व्यवस्था कोविड काल में लागू की गई थी जो वर्तमान में भी अमल में लाई जा रही है। न्यायालय का चक्कर लगाने से बचने को पुलिस कर्मियों ने यह व्यवस्था अभी तक अमल कर रखी है। इस बाबत वकीलों के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग गवाही पर प्रतिबंध की मांग करते हुए एक पत्र उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेजा है। बार काउंसिल अध्यक्ष से इस पर रोक लगाने की मांग की है। अधिवक्ताओं की ओर से भेजे गए इस पत्र में कहा गया है कि वर्तमान में प्रदेश के अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित आपराधिक मामलों की न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं गुणवत्ता को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहा है। वकीलों का कहना है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान उत्पन्न आपातकालीन परिस्थितियों में न्यायालयों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साक्ष्य ग्रहण एवं गवाही की प्रक्रिया को अस्थाई विकल्प के रूप में स्वीकार किया गया था। परंतु वर्तमान में जब सामान्य स्थितियां बहाल हो चुकी हैं एवं न्यायालय नियमित रूप से भौतिक रूप से संचालित हो रहे हैं, ऐसे में पुलिस अधिकारियों द्वारा निरंतर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही देने की प्रवृत्ति चिंता का विषय बन चुकी है। अधिवक्ता जफर अली, फरीद उद्दीन, आसिफ फारूकी समेत अन्य ने इसका विरोध शुरू किया है।

– वकीलों ने रखे मजबूत तर्क
जनपद न्यायालय के अधिवक्ताओं का कहना है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही के दौरान अधिवक्ताओं को गवाह के शारीरिक हाव-भाव, भाव-भंगिमा, वाणी की स्पष्टता एवं अन्य मनोवैज्ञानिक संकेतों का सटीक अवलोकन करने में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे गवाही की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। अनेक न्यायालयों एवं पुलिस थानों में तकनीकी संसाधनों की अपर्याप्तता एवं अस्थिर इंटरनेट कनेक्टिविटी के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब होता है। गवाह की प्रत्यक्ष उपस्थिति न्याय की पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक है, जिसे वीसी के माध्यम से सुनिश्चित कर पाना संभव नहीं है। कई बार पुलिस अधिकारी वीसी पर समय से उपस्थित नहीं होते या तकनीकी कारणों का हवाला देकर कार्यवाही को टालने का प्रयास करते हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है। गवाह की न्यायालय में प्रत्यक्ष उपस्थिति न केवल विधिक औपचारिकता, बल्कि न्यायालय की प्रतिष्ठा एवं गंभीरता की भी प्रतीक होती है, जो वीसी माध्यम से स्पष्ट नहीं हो पाती।

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