मुख्यपृष्ठस्तंभ`धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब कहीं मेरा नंबर तो नहीं?'

`धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब कहीं मेरा नंबर तो नहीं?’

-क्या ‘गड्ढाकरी’ को दिखने लगा जनाक्रोश का गड्ढा?
-गडकरी ने शुरू की ‘एग्जिट’ की भूमिका
-ई-२० पर बढ़ते विरोध और मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच बोले,
-`अब ज्यादा काम नहीं कर सकता, नई पीढ़ी को मौका मिले’

-जुलाई में केंद्रीय मंत्रिपरिषद से धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है, क्या गडकरी भी समझ रहे हैं कि फेरबदल की अगली सूची में किसी भी बड़े नाम की बारी आ सकती है?

नागपुर / केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि `अब वह पहले जितना काम नहीं कर पाते और नई पीढ़ी को ज्यादा जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।’ बयान आते ही राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं, खासकर इसलिए क्योंकि यह टिप्पणी संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच सामने आई।
हालांकि, गडकरी के कार्यालय ने बाद में सफाई दी कि उनकी टिप्पणी राजनीति या मंत्री पद छोड़ने को लेकर नहीं थी। कार्यालय के मुताबिक, वह अपने द्वारा स्थापित लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के सामाजिक कार्यों की बात कर रहे थे और उसी संदर्भ में नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई थी। लेकिन राजनीतिक बयान सिर्फ शब्दों से नहीं, समय और माहौल से भी पढ़े जाते हैं। और इस समय माहौल गडकरी के लिए आसान नहीं है।
ई-२० ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
गडकरी के लिए दूसरी बड़ी परेशानी ई-२० पेट्रोल को लेकर पैदा हुआ विवाद है। पुराने वाहनों पर असर, माइलेज घटने और उपभोक्ता हितों को लेकर विपक्ष तथा वाहन मालिकों के एक हिस्से ने सवाल उठाए हैं। नागपुर में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता ई-२० के विरोध में गडकरी के घर का घेराव करने भी पहुंचे थे। यानी जिस एथेनॉल नीति को सरकार किसान, पर्यावरण और विदेशी मुद्रा बचत की बड़ी उपलब्धि बताती रही, वही अब राजनीतिक असंतोष का केंद्र भी बन गई है। इसीलिए गडकरी का अचानक यह कहना कि ‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता, नई पीढ़ी को मौका देना चाहिए’ केवल सामाजिक संस्था की सामान्य टिप्पणी मानकर खत्म कर देना भी राजनीतिक रूप से आसान नहीं है।
गड्ढों के बाद अब सुरक्षित ‘एग्जिट लेन’?
देश में सड़क निर्माण की उपलब्धियों का श्रेय लेने वाले गडकरी को खराब सड़कों और गड्ढों पर सोशल मीडिया आलोचना भी झेलनी पड़ी है। स्वयं गडकरी कई बार खराब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, ठेकेदारों और अत्यधिक उप-ठेकेदारी को सड़क गुणवत्ता की समस्या बता चुके हैं। अब राजनीति की सड़क पर भी उन्होंने शायद एक एग्जिट लेन खुली छोड़ दी है, ‘नई पीढ़ी को मौका मिलना चाहिए।’ आज वह कह रहे हैं यह बात ट्रस्ट के लिए थी। कल यही वाक्य राजनीति पर भी लागू हो गया तो?
पहले भूमिका फिर विदाई?
राजनीति में नेता शायद ही कभी सीधे कहते हैं कि अब मेरा समय पूरा हुआ। पहले संकेत आते हैं, ‘नई पीढ़ी को मौका’, ‘बहुत काम कर लिया’, ‘अब मार्गदर्शन करूंगा।’ ‘पद महत्वपूर्ण नहीं है।’ फिर परिस्थितियां पैâसला करती हैं कि वह त्याग कहलाएगा या हटाया जाना। गडकरी अनुभवी राजनेता हैं। वे राजनीतिक हवा पहचानना जानते हैं। धर्मेंद्र प्रधान की विदाई के बाद यदि संभावित फेरबदल की चर्चा तेज है और दूसरी तरफ ई-२० को लेकर असंतोष भी है, तो उनके बयान को राजनीतिक चश्मे से पढ़ा जाना अस्वाभाविक नहीं। लेकिन फिलहाल, यह कहना कि उन्होंने मंत्री पद जाने की आशंका में ही यह बयान दिया, तथ्य नहीं, बल्कि राजनीतिक व्याख्या होगी। और यहीं व्यंग्य की गुंजाइश सबसे ज्यादा है।

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