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काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार…

ऑनलाइन हर काम है, ऑनलाइन व्यवहार।
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

शिक्षक अब पढ़ाए भी, पोर्टल भरे हजार,
कक्षा में फिर पूछते, क्यों खोले सरकार।
ऊपर डिजिटल युग कहें, नीचे करें प्रहार—
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

व्हाट्सऐप पर आ रहे, आदेशों के भार,
पल-पल नई रिपोर्ट का, बढ़ता कारोबार।
दिनभर लिंकें भर रहा, शिक्षक बारंबार—
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

हाजिरी भी ऐप पर, ऑनलाइन परिणाम,
यू-डाइस के फेर में, उलझा सारा काम।
चॉक छोड़ अब हाथ में, मोबाइल हर बार—
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

गुरु अब केवल गुरु नहीं, डेटा का मजदूर,
कागज़, पोर्टल, ऐप में होकर के मजबूर।
बच्चों का भविष्य भी बैठा है लाचार—
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

कोविड वाले दौर में, मोबाइल था प्राण,
घर-घर शिक्षा बाँटता, बना वही भगवान।
अब उसी पर उठ रहे, अनुशासन के वार—
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

सौरभ कहे, व्यवस्था का बदले अब व्यवहार,
सुविधाएँ भी दीजिए, मत कीजिए प्रहार।
साधन को दोषी कहें, कैसी ये सरकार—
काम सभी मोबाइल से, फिर कैसी तकरार॥

-डॉ. सत्यवान सौरभ

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