मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनापेट्रोल बचाने चले, देते बड़े बयान... ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

पेट्रोल बचाने चले, देते बड़े बयान… ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

मंचों पर हैं सादगी, रखते बड़े विचार,
पीछे एसी गाड़ियाँ, ले चलता परिवार।
ऊपर संयम ओढ़ते, भीतर भोग-विधान—
ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

पत्नी जाए बाजार तो, गाड़ी हो तैयार,
बच्चों के स्कूल तक भी सरकारी कार।
सेवा के साधन लिए, पाल लिया अभिमान—
ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

जनता टैक्सों से भरे, शासन का भंडार,
फिर भी जनता ढो रही, महँगाई का भार।
आम आदमी सोचता, कैसे बने मकान—
ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

भाषण में पर्यावरण, भीतर पूरा ठाठ,
जनता को उपदेश दें, खुद उड़ाएँ बाट।
जन-जन अब यह पूछता, किसका है नुकसान—
ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

पहले स्वयं उदाहरण, फिर देना उपदेश,
कर्म बिना हैं खोखले, भाषण और संदेश।
सौरभ कहे, तभी बचे जनता का सम्मान—
ले सरकारी गाड़ियाँ, घुमाते खानदान॥

— डॉ. सत्यवान सौरभ

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