सामना संवाददाता / मुंबई
आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (एएम/एनएस इंडिया) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग जुड़ाव के क्षेत्रों में सहयोग करने के लिए एक रणनीतिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह साझेदारी प्रतिभा विकास, व्यावहारिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी नवाचार और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एक मंच तैयार करने हेतु एएम/एनएस इंडिया की औद्योगिक विशेषज्ञता व ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग फुटप्रिंट और आईआईटी रुड़की की शैक्षणिक व अनुसंधान उत्कृष्टता को एक साथ लाती है।
एमओयू के तहत, दोनों भागीदार इन क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाएंगे:
• शैक्षणिक कार्यक्रमों, एग्जीक्युटिव एजुकेशन, व्यावसायिक विकास पाठ्यक्रमों और कार्यबल परिवर्तन पहलों का संयुक्त विकास और वितरण
• उद्योग-केंद्रित परामर्श, तकनीकी सलाहकार सेवाएं, समस्या-समाधान जुड़ाव और प्रौद्योगिकी मूल्यांकन
• सहयोगात्मक अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास, प्रकाशन, बौद्धिक संपदा निर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहल
एएम/एनएस इंडिया प्रतिभा विकास, व्यावहारिक अनुसंधान, नवाचार और उद्योग जुड़ाव के क्षेत्रों में साझेदारी के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अपने उद्योग-एकीकृत शिक्षा मंच, नैमटेक का उपयोग करेगा। शिक्षा जगत और उद्योग के बीच की दूरी को पाटने के लिए स्थापित, नैमटेक भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं का निर्माण करने और अनुसंधान को औद्योगिक प्रभाव में बदलने की गति को तेज करने के लिए अनुभवात्मक शिक्षण, उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम और वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान को एक साथ लाता है।
यह साझेदारी भविष्य के लिए तैयार प्रतिभाओं के निर्माण और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग व औद्योगिक नवाचार में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इससे छात्रों, शोधकर्ताओं, संकायों और उद्योग के पेशेवरों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों पर मिलकर काम करने और देश के दीर्घकालिक औद्योगिक व आर्थिक विकास में योगदान देने के अवसर मिलने की उम्मीद है।
इस अवसर पर बात करते हुए एएम/एनएस इंडिया के सीईओ, श्री दिलीप ओम्मेन ने कहा, “भारत के औद्योगिक परिवर्तन के लिए उद्योग और शिक्षा जगत के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता होगी। आईआईटी रुड़की के साथ इस रणनीतिक सहयोग के माध्यम से और नैमटेक को अपने उद्योग-एकीकृत शिक्षा और नवाचार मंच के रूप में उपयोग करते हुए, हमारा लक्ष्य भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा का निर्माण करना, व्यावहारिक अनुसंधान में तेजी लाना और ऐसे प्रभावशाली समाधान विकसित करना है जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग और स्टील क्षेत्रों की प्रतिस्पर्धात्मकता और स्थिरता को मजबूत करें।”
