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भाजपा राज में चल रहा था अवैध नाइट क्लब… भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ीं २५ जिंदगियां!

-एक साल पहले मिला था ध्वस्त करने का नोटिस

-कार्रवाई के बजाय प्रशासन कर रहा था हादसे का इंतजार

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

भाजपा के राज में नॉर्थ गोवा के अरपोरा में स्थित नाइट क्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात भीषण आग लगने से कम से कम २५ लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में चार पर्यटक और १४ स्टाफ सदस्य शामिल हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह क्लब अवैध रूप से चल रहा था और इसके ध्वस्त करने का पिछले साल आदेश दिया गया था। खबरों के मुताबिक, क्लब के एंट्री, एग्जिट गेट बेहद संकरे थे, जिससे लोगों ने घटनास्थल पर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।
जांच में खुलासा हुआ है कि ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ नाइट क्लब में आने और जाने की जगह दोनों ही बेहद संकरे थे। बैकवाटर के किनारे बने इस क्लब तक पहुंचने का सिर्फ एक संकरा रास्ता था। फायर ब्रिगेड के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फायर टेंडर को घटनास्थल से करीब ४०० मीटर दूर खड़ा करना पड़ा, जिससे आग बुझाने और बचाव कार्य में काफी देरी हुई। अधिकांश मौतें दम घुटने से हुर्इं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब लोग आग से बचने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे तो अफरा-तफरी मच गई। हैदराबाद की एक पर्यटक फातिमा शेख ने बताया कि जब आग भड़की तो कई पर्यटक अफरा-तफरी में नीचे की ओर भागे और ग्राउंड फ्लोर पर स्थित रसोई में पहुंच गए, जहां वह क्लब में मौजूद स्टाफ के साथ फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वीकेंड की वजह से क्लब खचाखच भरा हुआ था और डांस फ्लोर पर लगभग १०० लोग मौजूद थे। कुछ ही मिनटों में पूरा क्लब आग की लपटों में घिर गया और ताड़ के पत्तों से बने अस्थायी ढांचों ने आग को और तेज कर दिया।
क्लब के पास नहीं था कोई लाइसेंस
जांच में पता चला है कि यह नाइट क्लब अवैध रूप से चल रहा था और जिसको ध्वस्त करने का अरपोरा-नागोआ पंचायत ने पिछले साल ही डिमॉलिशन नोटिस जारी किया था। अरपोरा-नागोआ सरपंच रोशन रेडकर ने बताया कि क्लब का पूरा ढांचा अवैध था। शिकायत मिलने पर जांच की गई तो क्लब के पास कोई वैध निर्माण लाइसेंस नहीं मिला और क्लब में फायर सेफ्टी नियमों का घोर उल्लंघन हो रहा था।
बेखौफ चलता रहा नाईट क्लब
पंचायत ने क्लब को डिमॉलिशन का नोटिस जारी किया था, लेकिन अपील के बाद पंचायत निदेशालय ने उसे स्थगित कर दिया और क्लब बेखौफ होकर चलता रहा। इतना ही नहीं, क्लब द्वारा पर्यावरण संबंधी मंजूरियां भी नहीं ली गई थीं। यह क्लब बैकवाटर क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण था। इसके अलावा क्लब संचालक सौरभ लुथरा के साथ जमीन मालिकों और बिजनेस पार्टनरों के विवाद के कारण भी कई शिकायतें आई थीं।

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