शीतल अवस्थी
सनातन धर्म को मानने वाला हर व्यक्ति श्राद्धपक्ष में पूर्वजों को प्रसन्न करने के कई धार्मिक उपाय अपनाकर खुशहाल जीवन की चाहत करता है। ये कामनाएं पूरी करने के लिए शास्त्रों में ऐसे उपाय भी उजागर हैं, जो श्राद्धपक्ष में ही नहीं पूरे वर्षभर पितरों की प्रसन्नता के लिए किए जा सकते हैं। खासतौर पर ये उपाय उन लोगों के लिए बड़े ही आसान व शुभ फलदायी लिए जो कामकाजी जीवन में ज्यादा वक्त नहीं निकाल पाते या फिर धर्म-कर्म की ज्यादा जानकारी नहीं रखते। यहां बताए जा रहे हैं कि पितृदोष को दूर करने के लिए दैनिक जीवन के कुछ ऐसे ही उपाय, जो किसी भी व्यक्ति की कुण्डली में शनि, राहु, सूर्य और गुरु ग्रहों की युति और उनके साथ अन्य ग्रहों के बुरे प्रभावों से बने पितृदोष को भी दूर कर सुखी, सफल और वैभवशाली जीवन की राह आसान बनाने वाले माने गए हैं। जानिए ये खास उपाय –
-पिता, गुरु व उम्र में बड़े लोगों का अपमान न करें और उनकी खुशी के लिए हरसंभव कोशिश करें।
-देवता और पितरों की पूजा स्थान पर जल से भरा कलश रखकर सुबह तुलसी या हरे पेड़ों में चढ़ाएं।
-भोजन से पहले तेल लगी दो रोटी गाय को खिलाएं।
-हर रोज संभव हो तो चिड़िया या दूसरे पक्षियों के खाने-पीने के लिए अन्न के दाने और पानी रखें।
-हर शनिवार को पीपल या वट की जड़ों में दूध चढाएं।
-हर रोज तैयार भोजन में से तीन भाग गाय, कुत्ते और कौए के लिए निकालें और उन्हें खिलाएं।
-किसी तीर्थ पर जाएं तो पितरों के लिए तीन बार अंजलि में जल से तर्पण करना न भूलें।
-रोज तैयार भोजन में से एक भाग अन्न का निकालकर उसकी पितरों की प्रसन्नता के लिए गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर धूप दें या अग्रि में हवन करें।
-हर रोज माता-पिता और गुरु के चरण छूकर आशीर्वाद लेने से पितरों की प्रसन्नता मिलती है।
-श्राद्धपक्ष या वार्षिक श्राद्ध में ब्राह्मणों के लिए तैयार भोजन में पितरों की पसंद का पकवान जरूर बनाएं।
