एड. राजीव मिश्र मुंबई
सुबह के आठ बजि रहा है, झोरन अपने दुआरे चाय पीयय के बाद अखबार के पन्ना-पन्ना चाटय में लगे हैं। १४ नंबर पेज पर निकरा अवधी व्यंग्य पढ़तय रहे तब तक कउनउ ओर से दूधनाथ मस्त पैंट-शर्ट और ओहिके ऊपर चकाचक जाकिट पहिन के आइ गए। दूधनाथ के देखतै झोरन दूधनाथ से पूछे, का हो दूधनाथ! कहां सवारी निकरी है सुबह-सुबह ? बात अइसन है झोरन आज हमरी मीटिंग है रघुवंशी होटल मा। दूधनाथ कुछ तो करत है इतना तो झोरन के पता रहा पर अइसन कुछ करत है जिला के सबसे बड़ा होटल, होटल रघुवंशी मा मीटिंग करत है उ आज पता चला। सुनीथऽ दूधनाथ रघुवंशी होटल के खाना एक नंबर होत ह? हां झोरन, खाना तो पुछबय न करो, एक बार खइहौ तो अंगुरी चाटत रहि जइहौ। आइसक्रीम तो पुछबय न करो, अइसन लागत है कि मानो अमृत खाई रह्यौ है। झोरन के मुंह में पानी भरि आवा। भैया तुम्हरी तो चांदी है, एक से एक होटल में पार्टी करत है। हमरी किस्मत में तो बस नेता ढाबा के लौकी-चना ही लिखा है। अइसन काहें कहत हौ भैया, आज तो हम तुमका लेइ जाए बिना ही आये हैं। एक काम करो जल्दी से तैयार होइ जाओ अउर आज हमरे साथ तुमहुं चलो होटल रघुवंशी। इतना सुनतय बात-के-बात में झोरन भी झकास कुर्ता-पैजामा में मस्त सदरी पहिन के तैयार होइ गए।
हॉल में पहुंचे तो मीटिंग शुरू होइ गई रही, ऊपर कोट-पैंट पहिन के एक अदमी बोलत रहा, का तुम लोग नही चाहत हौ कि तुम लोग महीना के तीन लाख कमाओ, यस आर नो? का तुम लोग नही चाहत हौ कि तुम लोग, हवाई जहाज से आओ जाओ? यस आर नो, का तुम लोग नही चाहत हौ कि तुम लोग के लग्गे आपन खुद के बीएमडब्ल्यू कार होय? यस आर नो, अब सब यस कहत रहें तो झोरन भी यस कहि दीहें। इतना सुनतै दूधनाथ एक ठो फारम लइके आइ गए बोले भइया यहि फारम में साइन करो अउर ७,५०० रुपिया डिपॉजिट करो। अगिले महीना से महीना के लाख रुपिया कमाओ। अइसा है दूधनाथ! एक बार अपने बड़कना से पुछि लेवय देव। गजब हौ जब तुम अपने मन से ७,५०० रुपिया नहीं खर्च कइ सकत हौ तो हम का कही। खैर चलो पुछि लेव इतना कहिके दूधनाथ बुफे सिस्टम की तरफ बढ़ि गए। झोरन भी पीछे-पीछे भागे पर दूधनाथ आगे निकरि गवा रहें। आगे बढ़तय एक मनई झोरन के रोकि लिहिस, तुम प्लान ज्वाइन किये हौ? नहीं अबही नहीं किये हैं पर लड़िका से पूछिके ज्वाइन करबै। तो ई खाना भी तुम्हरे लिए नहीं है, चलो निकरो इहां से। इतना कहिके सिक्योरिटी वाला झोरन के धकियाय के बाहर कइ दिहिस। तब से लइके आज तक झोरन अपने लाठी में तेल लगाई के दूधनाथ के खोजि रहें हैं।
