बाबा भोलेनाथ

बम-बम बाबा भोलेनाथ
तुम हो सत्यं शिवम् सुन्दरम्
चंद्र विराजे जटा जूट
मां गंगा की बह चली धार।
कंठ धार लिया जब हलाहल
नील कंठ कहलाए।
वामांगे साजे मां गौरा
विनायक, कार्त्तिकेय दायें -बायें
नन्दी सिंह मोर मूषक
वाहन बन अघाये।
एक हाथ डमरू साजे
दूसरी हाथ थामा त्रिशूल
माथे सोहे नेत्र तीसरा
त्रिलोकी नाथ कहलाये।
गले पहनी मुंड माल
संग पहनी रुद्राक्ष माल
नाग वासूकी ने पाया
ग्रीवा में स्थान
दे रहे भक्तों को अभयदान।
थोड़ी सी भक्ति सो होते प्रसन्न
तभी कहलाते भोलेनाथ।
भक्ती शक्ति का संगम हो
शिव बाबा कैलाश वासी
जब जब कृपा हो तुम्हारी
पाये रिद्धियों सिद्धियों की दात
रुद्र हो रौद्र रूप दिखायें
कर तांडव अधर्म मिटाएं
फिर भी करुणा सागर कहलाएं।
करो कृपा नवाऊं माथ
हर हर महादेव भोलेनाथ।
बेला विरदी।

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