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दोनों हाथों से ग्राहकों को लूट रहे हैं बैंक…आम जनता पर चौतरफा मार!

मनमोहन सिंह

अगर आपके पास बैंक खाता है, जो आपकी जरूरत भी है और जेब में डेबिट कार्ड, तो मान जाइए की बैंक आपको दोनों हाथों से लूट रहे हैं। संसद में पेश आंकड़ों के विश्लेषण से चौंकाने वाली बात सामने आई है कि देश के सरकारी और प्राइवेट बैंक बिना कोई शोर मचाए आम जनता की जेब ढीली कर रहे हैं।
इसे बैंकिंग सुरक्षा नहीं, बल्कि सरेआम लूट कहा जाना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। क्योंकि बैंक ग्राहकों से दो तरफा वसूली कर रहे हैं। पहली मार, डेबिट कार्ड का सालाना चार्ज लगभग दोगुना जिस डेबिट या एटीएम कार्ड का इस्तेमाल आप अपना ही पैसा निकालने के लिए करते हैं, उसकी सालाना फीस यानी एनुअल मेंटेनेंस चार्ज चुपके से लगभग ९० प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। ४-५ साल पहले जिस कार्ड का चार्ज औसतन ६१ रुपए था, आज वह बढ़कर ११५ रुपए से ऊपर पहुंच चुका है। रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ डेबिट कार्ड के नाम पर सरकारी बैंकों ने ग्राहकों से ७,५०० करोड़ से ज्यादा बटोर लिए हैं।
दूसरी मार, खाते में पैसा न होने पर भी पेनल्टी
महंगाई के इस दौर में अगर आम ग्राहक अपने खाते में तय मिनिमम बैलेंस नहीं रख पाता, तो बैंक उस पर जुर्माना ठोक देते हैं। अकेले वित्त वर्ष २०२५-२६ में बैंकों ने इस जुर्माने के नाम पर ७,०८६ करोड़ से ज्यादा वसूल किए।
इस वसूली में प्राइवेट बैंक सबसे आगे हैं, जिन्होंने कुल जुर्माने का लगभग ७० प्रतिशत (करीब ४,९४८ करोड़) अकेले वसूला है।
एचडीएफसी और एक्सिस बैंक इस लिस्ट में सबसे ऊपर रहे। अब सवाल यह उठता है कि राहत देने की जगह, जब खाते में पैसे कम हों तब भी जेब काटना कहां का न्याय है? हालांकि अधिकांश कुछ सरकारी बैंकों ने बचत खातों से यह जुर्माना हटा दिया है, लेकिन प्राइवेट बैंकों की यह मनमानी जारी है। यह बात अलग है कि रिजर्व बैंक के सख्त आदेश हैं कि पेनल्टी लगाने से पहले ग्राहक को एसएमएस ईमेल के जरिए चेतावनी देनी होगी। लेकिन क्या इतना काफी है? सवाल यही है कि क्या बैंकिंग सेवाएं आम आदमी के लिए राहत हैं या नया बोझ।

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