मुख्यपृष्ठस्तंभभोजपुरिया व्यंग्य :  बोलइ के बीमारी से परेशान बाडे नेताजी

भोजपुरिया व्यंग्य :  बोलइ के बीमारी से परेशान बाडे नेताजी

प्रभुनाथ शुक्ल, भदोही

गांव के चउक पर नेताजी के कुर्सी लागल रहे। माइक सामने, कैमरा चालू आ भीड़ चार गो। नेताजी गला साफ कइलें आ बोललें। हम जे बोलतानी, सोच-समझ के बोलतानी!
पीछे से एगो बुजुर्ग धीरे से कहलें, तब त पहिले भगवान से प्रार्थना करीं कि सोचल जरूर करीं! असल में बीमारी गंभीर बा, बोलइ के बीमारी।
ई अइसन बीमारी ह, जेकरा में आदमी बिना पूछले बोलता, बिना मतलब बोलता आ कब बोलल जरूरी बा, तब चुप रह जाता। कुछ लोग त एतना बोलऽ लागेला कि सामने वाला सोचेला, ई आदमी के मुंह में ब्रेक काहे ना लागेला। हमनी के समाज में पहिले वात, कफ आ पित्त के बीमारी सुनाई देत रहे। अब एगो नया रोग पैदा हो गइल बा बात रोग। डॉक्टर लोग अभी ले एकर दवाई ना खोज पवले बा, बाकि नेता लोग एकर इलाज खूब जानेला, माफी मांग लिहीं! बात रोग के सबसे खतरनाक संक्रमण सफेदपोश समाज में देखे के मिलेला। पद मिलल, कुर्सी मिलल, माला पड़ल आ आदमी के भीतर के फिल्टर गायब! फेर शुरू होला बयान, हमरा से बड़ा समाजसेवी केहू नइखे। दूसरा पूछेला, ‘काम कब कइनी?’ जवाब आवेला, काम के बात मत करीं, हम बयान बहुत बढ़िया देतानी। बोलते-बोलते बात एतना आगे बढ़ जाला कि सामने वाला भी बोल पड़े ला। फिर शुरू होला वाकयुद्ध। सोशलमीडिया पर पोस्ट, कमेंट, वीडियो आ लाइव, पूरा समाज अखाड़ा बन जाला। बाकि आजकल बात रोगी आदमी पहिले बोलता, बाद में सोचता। जब बयान वायरल हो जाला, लोग विरोध करे लागेला, तब नेताजी के सलाहकार दौड़त आवेलन, सर! अब माफी मांग दीं।
नेताजी पूछेलन, माफी से काम चल जाई? सलाहकार कहेला, सर, अभी माफी के गोली खा लीं, बाद में देखल जाई! आ नेताजी कैमरा के सामने हाथ जोड़ देलें। अगर हमरा बयान से केहू के भावना आहत भइल होखे, त हम खेद व्यक्त करतानी।
बस! बीमारी के संक्रमण कुछ देर खातिर थम जाला। बाकि असली सवाल ई बा कि हम बोलत काहे बानी? हर बात बोलल जरूरी नइखे। शब्द के भी वजन होला। एगो गलत शब्द रिश्ते तोड़ सकेला, समाज में नफरत पैâला सकेला आ आदमी के बरसों के कमावल सम्मान मिनट भर में मिट्टी में मिला सकेला। रहीम जी बहुत पहिले चेतवले रहले, रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। मतलब साफ बा, जुबान पागल हो सकेला, लेकिन ओकर सजा माथा के भुगते के पड़ेला। एहसे पद होखे, प्रतिष्ठा होखे चाहे रुतबा। बोलने से पहिले सोचल जरूरी बा। काहे कि गोली बंदूक से निकलला के बाद वापस ना आवेला, आ बात मुंह से निकलला के बाद ओकरा के वापस निगलल संभव ना होला। आज जरूरत बोलइया बढ़ावे के ना, सोचइया बढ़ावे के बा। काहे कि समाज के सबसे खतरनाक बीमारी चुप्पी ना ह। गलत समय पर गलत बात बोल देवे के बीमारी ह
!! समाप्त !!

अन्य समाचार