राजेश विक्रांत
हिंदी और अंग्रेजी की लेखिका डॉ कनक लता तिवारी की कहानियों की पुस्तक है हरा नोट। इसे प्रतीक पब्लिकेशन मुंबई के एड राजीव मिश्र ‘मधुकर’ ने महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित किया है। डॉ तिवारी की चार पुस्तक अंग्रेजी में भी प्रकाशित हुई है। वे कविता, कहानी व बाल कहानी की सुविख्यात लेखिका व सामयिक विषयों की नामचीन स्तंभकार हैं।
कथाकार हेमलता त्रिपाठी के अनुसार कहानी जिंदगी की विसंगतियों का सकारात्मक दर्पण होती है जिसमें मनुष्य अपनी संवेदनाओं के रंग देखता है। डॉ तिवारी ने अपने कथा संग्रह हरा नोट में इसे विस्तार दिया है। वे कहती हैं कि कहानी खुद को व्यक्त करने का एक प्रभावी तरीका है। अपनी हर कहानी में मैं कई अनुभवों से गुजरी हूं और पात्रों के साथ जैसे मैं खुद भी उसे कहानी को जी लेती हूं। संग्रह में कुल 21 कहानियां हैं- हरा नोट, हस्ताक्षर, भूख की मौत या मौत की भूख, केश तरंगिणी, दूसरा कौन, द्रौपदी, देवी, तर्पण, अनकही, धोखा, प्यास, प्रत्यावर्तन, नाता, चौबीस सालों में घटती हुई एक घटना, बलिदान, प्रतिमा टूट ही गई, बीजारोपण भूत बचाओ, परछाई होता प्रेम, प्रतिशोध, फैसला तथा और रास्ता कहां तक जाता था।
डॉ तिवारी की भाषा शैली अद्भुत है। कहानी हरा नोट की शुरुआती पंक्तियां देखिए- “बाहर से आती हहराती हवा की आवाज मंगेश के कानों पर हथौड़ा सी बरसा रही थी। सावन की बरसती बूंदों ने भी हाहाकारी रूप सा धर लिया था। बीच-बीच में बिजली की गड़गड़ाहट रात की स्तब्धता को चीर दे रही थी। तभी सर पर पड़ी बूंद से चौक कर मंगेश ने सर उठाया, ” कमबख्त कोठरी ने फिर से चूना शुरू कर दिया, जाने कब से मरम्मत माँग रही है छत। लेकिन कहाँ से कराये ? पेट की रोटियों का जुगाड़ हो ले वही बहुत है।”
डॉ तिवारी परिवेश का उल्लेख भी बड़ी सूक्ष्मता से करती हैं- कहानी हस्ताक्षर से यह उदाहरण प्रस्तुत है- “सरिता ने चारो तरफ निगाह डाली, वही सफ़ेद ठंडी दीवारें, हरे परदे, सारा का सारा कमरा बेजान सा। वह राहुल के पास रखी अलमारी को देखने लगी। ये भी उसी ठण्डे बेलाग से सफ़ेद रंग से पुती है। अलमारी के एक कोने पर पेण्ट थोड़ा उखड़ सा गया है और अंदर से पुराना मटमैला रंग झांक रहा है। मानो इंसान की ऊपरी चमक दमक से उसके मन की अस्वच्छता झाँक रही हो। सरिता असहज हो उठी।”
मार्मिकता उनकी कहानियों का प्रबल पक्ष है। भूख की मौत या मौत की भूख को राम चेलवा की मृत्यु के परिवेश में उन्होंने व्यक्त किया है। कहानी केश तरंगिणी एक रिपोर्ताज सी है जो कीमोथेरेपी के बाद राजमा की हालत बयां करती है। जिसमें शोभा उजड़े महल को सुसज्जित करने की सोच रखती है। मल्टीप्ल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर से पीढ़ी दिव्या की संवेदनशील कथा है दूसरा कौन। मन की इच्छाओं का आईना द्रौपदी है। देवी में अंधविश्वास है। जीवन के उतार चढ़ाव तर्पण में दिखता है जिसकी आखरी पंक्तियां हैं- पंडित द्वारा तर्पण करवाते वक्त समय जब खीर और भोज्य पदार्थ अर्पित किए जा रहे थे तो उस तर्पण की अधिकारिणी भूखी प्यासी धूप में भीख का कटोरा लिए खड़ी थी। अनकही कहानी श्रावस्ती के इतिहास का एक अनकहा पन्ना है। आज के रिश्तों की कड़वी सच्चाई धोखा में दिखेगी जबकि विकास के दावों की पोल खोल प्यास में हुई है। प्रत्यावर्तन डायरी विधा में लिखी गई कहानी है। इसके साथ ही नाता, 24 सालों से घटती हुई एक घटना के ई एम अस्पताल की नर्स अरुणा शानबाग की वेदना याद दिलाती है। बलिदान, प्रोतिमा टूट ही गई, बीजारोपण, भूत बचाओ, परछाई होता प्रेम, प्रतिरोध, फैसला, वो रास्ता कहां तक जाता है इन कहानियों के कथानक एकदम नए हैं। 106 पृष्ठों के इस संग्रह का मूल्य 275 रुपए है।
