मुख्यपृष्ठस्तंभब्रजभाषा व्यंग्य : आंखमारू बट्टा

ब्रजभाषा व्यंग्य : आंखमारू बट्टा

नवीन सी. चतुर्वेदी
कछू कहौ साब नॉस्टेल्जिया तौ नॉस्टेल्जिया है। याके जैसौ आनंद और कहूं नांय। ऐसौ हम या मारें कह रहे हैं कि आज हमें नॉस्टेल्जिया पै बात करनी है। जब याके विरुद्ध बोलनों होयगौ तब अलग्ग राग अलापंगे। ऐसें ही तौ होवै है। राजनीति यैही तौ सिखाय रही है। विपक्ष में रहौ तब कहौ ‘सड़कें चौड़ी मत करो वरना गली मुहल्ले समाप्त हो जायेंगे’ और जब सत्ता में आय जाऔ तौ कहौ ‘अगर सड़कें चौड़ी नहीं की गयीं तो विकास वैâसे होगा?’ बस ऐसें ही बिरेंटी फिराते रहौ। पब्लिक कौ का है? टिकट खरीद कें तमासे देखती रही है, देखती रहैगी। आजकल तौ लोग टिकट खरीद कें तारी बजायवे हु जामन लगे हैं। एक जगें तौ ऐसौ अजूबौ देखौ – एक विद्वान प्रवचन दै रहे हुते – ‘बुरा वो विधर्मी है जो हमसे दूर है, जो विधर्मी हमारे पास है, हमारा पड़ौसी है, वो बुरा नहीं है, वो तो अच्छा है, वो तो हमारा ध्यान रखता है। हमारी रक्षा करता है।’ का बतामें साब या डायलॉग कों सुनते ही पब्लिक जोर-जोर सों तारी बजामन लगी। कसमीर सों कन्याकुमारी तक और सोमनाथ सों बंगाल तक सबनें या रील कों देखौ कि वैâसे-वैâसे लोग तारी बजाय रहे हुते, वौ हू टिकट खरीद कें। तौ भैया लौट कें हम नॉस्टेल्जिया पै आमें। झुमरीतलैया में हर दस-बीस कदम पै एक पान की दुकान हो’औ करती। हर दुकान में एक बड़ौ सौ बट्टा मतबल मिरर लगौ हो’औ करतो। और भैया विन बट्टा’न पै मत पूछौ कौन-कौन के फोटू लगे रहते। कहूं हेमामालिनी तौ कहूं परवीन बॉबी बिराजमान रहतीं। लोग पान खाते-खाते विन फोटू’न कों ऐसें देखते मानों हिरोइन विनें ही देख रही होंय। फिर भैया बजार में एक नयी दुकान खुली। वानें अपनी दुकान के बट्टा पै जीनत अमान कौ फोटू लगायौ। वा फोटू की एक बिसेस बात और हुती कि वौ चलते भये आदमी’न कों देख कें आंख मारौ करती। खड़े भये आदमी’न कों बस देखती रहती। हां अगर खड़े भये आदमी खड़ें-खड़ें हु लेफ्ट-राइट है जाते तौ विनें हु आंखमारी कौ आनंद मिल जातो। देखते ही देखते सबरी दुकान’न की भीड़ वा आंखमारू बट्टा वारी दुकान पै आय गयी। का बतामें साब वा आंखमारू बट्टा वारी दुकान नें ऐसौ चूनों लगायौ, ऐसौ चूनों लगायौ कि भले-भले’न के भट्टा बैठ गये। अगर बात अभू आपकी समझ में न आयी होय तौ यै सुनों –
हम ही थे नादान, क्या बतलाएं आपको
सौंपी जिसे दुकान, वही तिजोरी ले उड़ा

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