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चलो दिल्ली!..५६ इंच की छाती पर चढ़ा ‘इंडिया’, मोदी सरकार के खिलाफ आर-पार का एलान!

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

चलो दिल्ली, चलो दिल्ली, चलो दिल्ली! इस आह्वान के साथ इंडिया गठबंधन ने सोमवार को मोदी सरकार के खिलाफ आर-पार की राजनीतिक लड़ाई का बिगुल फूंक दिया। वोट चोरी, मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की भूमिका पर उठते सवालों को लेकर राहुल गांधी ने मोर्चा संभाला। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक और निष्पक्ष जांच की मांग के साथ विपक्ष सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसदों तथा समर्थकों की भागीदारी ने आंदोलन को नया तेवर दिया। चुनाव आयोग के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब केंद्र सरकार की जवाबदेही मांगने वाले व्यापक राजनीतिक संघर्ष में बदल गया है। विपक्ष का दावा है कि मोदी सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
राहुल ने खोला मोर्चा-दिल्ली चलो!
राहुल गांधी ने छात्रों, युवाओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नागरिक संगठनों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली, मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया। मतदाता के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा के सवाल पर विपक्ष ने दलगत सीमाओं से बाहर समर्थन जुटाने का आह्वान किया। कनॉट प्लेस और बाराखंबा रोड के जंक्शन से मार्च शुरू करने का कार्यक्रम घोषित किया गया था। विपक्ष अपनी मांगें सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना चाहता था।
सड़कों पर उठी आवाज अब देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे तक पहुंच गई।
प्रशासन के हाथ-पांव फूले, दिल्ली में कड़ा पहरा!
विपक्ष के दिल्ली कूच को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा का घेरा कस दिया गया। प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए। पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंबा रोड मेट्रो स्टेशनों पर सुबह छह से शाम चार बजे तक प्रवेश और निकास बंद रखने की घोषणा की गई। इन पाबंदियों ने टकराव को और तेज कर दिया। विपक्ष पूछ रहा है, लोकतंत्र की रक्षा के लिए जुटने वालों के रास्ते क्यों रोके जा रहे हैं? प्रशासन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का तर्क दे रहा है। विपक्ष का आरोप है कि आवाजाही पर पाबंदियां लगाकर आंदोलन में लोगों की भागीदारी रोकने की कोशिश हो रही है।
युवाओं के आंदोलन ने विपक्ष को दी धार
कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर १० अक्टूबर को हुए प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई के बाद इंडिया गठबंधन का मार्च संघर्ष का अगला पड़ाव बना। युवाओं ने जिस विरोध को सड़कों पर उतारा, अब विपक्ष के प्रमुख दल उसे राजनीतिक ताकत देने के लिए मैदान में आए हैं। जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत ने आक्रोश बढ़ाया। अब उसी आक्रोश को व्यापक जनसमर्थन में बदलने की कोशिश है। सवाल सीधा है, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पात्र नागरिक के अधिकार की रक्षा कौन करेगा? भाजपा और आयोग वोट चोरी के आरोपों को खारिज करते हैं। लेकिन विपक्ष जांच और जवाबदेही की मांग पर अड़ा है।
अब सड़क से सत्ता तक संघर्ष!
इंडिया गठबंधन ने साफ कर दिया है कि वह इस लड़ाई को चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रखेगा। मोदी सरकार को भी जवाब देना होगा। भाजपा विपक्ष पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रही है, जबकि विपक्ष लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमले का सवाल उठा रहा है। दिल्ली में बैरिकेड खड़े हैं, मेट्रो के दरवाजों पर पाबंदियां हैं और सड़कों पर विपक्ष का मोर्चा। ‘चलो दिल्ली’ का आह्वान अब मोदी सरकार के खिलाफ खुली राजनीतिक चुनौती बन चुका है। विपक्ष का एलान है, मतदाता के अधिकार की लड़ाई अब आर-पार होगी!
विपक्ष को मिलने से इनकार, याचिका दाखिल करने को कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। लंबित न्यायिक मामलों और न्यायिक मर्यादा का हवाला देते हुए उन्होंने औपचारिक याचिका दाखिल करने को कहा। विपक्ष के सामने अब दो मोर्चे हैं-सड़कों पर राजनीतिक संघर्ष और अदालत में कानूनी लड़ाई। मतदाता सूची पर उठे सवालों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन संसद, निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका तक पहुंच चुका है।

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