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सरकारी तानाशाही और पुलिस लाठीशाही की परवाह किए बिना आदित्य ठाकरे के साथ हजारों जेन-जी का मौन मार्च

-अमित ठाकरे और तेजस ठाकरे भी मैदान में उतरे
-लोकतंत्र की रक्षा के लिए जोरदार हल्लाबोल!

सामना संवाददाता / मुंबई

देश में बढ़ती अराजकता और अन्याय के खिलाफ लड़ने और लोकतंत्र बचाने के लिए हजारों देशभक्त, युवक-युवतियां, विद्यार्थी और आम लोग सोमवार को मुंह पर काली पट्टियां बांधकर तथा हाथों में तिरंगा लेकर मुंबई की सड़कों पर उतर आए। दादर स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज मैदान परिसर में मांसाहेब मीनाताई ठाकरे की प्रतिमा के पास शिवसेना नेता, युवासेनाप्रमुख व विधायक आदित्य ठाकरे की उपस्थिति में मौन आंदोलन किया गया। शिवाजी पार्क परिसर में देशभक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। वहीं, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की ओर से हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। आदित्य ठाकरे ने चेतावनी दी कि गद्दार ज्ञानू के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा। यहां उपस्थित हजारों जेनजी ने ‘भ्रष्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाओ’ के जोरदार नारे लगाए।
ज्ञानू के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रहेगा…आदित्य ठाकरे ने दी चेतावनी
रविवार को छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क और शिवसेना भवन के पास आंदोलन के लिए पहुंचे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया था। आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे ने उनकी रिहाई की मांग को लेकर शिवसेना भवन तथा शिवाजी पार्क पुलिस थाने के बाहर धरना दिया। इसके बाद पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रिहा करना पड़ा। बाद में ठाकरे बंधुओं ने सोमवार को शिवाजी पार्क में मौन आंदोलन करने की घोषणा की थी।
इस आंदोलन में मुंबई सहित महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियां पहुंचीं। प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’, ‘सारे जाहिल कहां मिलेंगे, भाजपा के दफ्तर में’, ‘भ्रष्टाचार पर हमला बोल’, ‘वोट चोरी पर हमला बोल’ जैसे नारे लगाए। मुंह पर काले मुखौटे लगाकर उन्होंने सत्ताधारियों की कथित तानाशाही के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानू का इस्तीफा मांग रहा हूं, मोदी-शाह को क्यों चुभ रहा है’, ‘जांच एजेंसियों का डर, जांच का खेल’ और ‘मोदी-शाह ने लोकतंत्र को विफल कर दिया’ जैसे संदेश लिखे पोस्टर भी प्रदर्शित किए।
आदित्य ठाकरे ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब लोगों को केवल एक व्यक्ति की ‘मन की बात’ सुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है, तब किस तरह की खामोशी छा जाती है और लोगों का दम घुटने लगता है, इसका अनुभव आज देश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस की हम प्रशंसा करते रहे हैं, लेकिन पिछले दो दिनों के भयावह अनुभवों को देखकर ऐसा लगने लगा है कि क्या पुलिस को दिल्ली से आदेश दिए जा रहे हैं। आदित्य ठाकरे ने कहा कि अपने ही देश में अपने अधिकारों और कथित मत चोरी के खिलाफ लड़ने की नौबत आ गई है। ये आंदोलन देशभर में जारी रहेंगे। आंदोलन को मिले जबरदस्त समर्थन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह लड़ाई ‘भाजपा बनाम भारत’ की बन गई है।
ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप
आदित्य ठाकरे से जब पूछा गया कि इतने आंदोलनों के बावजूद ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा क्यों नहीं लिया गया, तो उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को बचाया नहीं गया था, लेकिन अब दिल्ली में कई गुना अधिक सुरक्षा बल तैनात करके ज्ञानेश कुमार को बचाया जा रहा है, क्योंकि सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से वोट चोरी कर सकती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी व सीजेपी नेताओं को रोकने के साथ-साथ युवक-युवतियों को हिरासत में लेने के लिए भारी संख्या में पुलिसकर्मियों को उतारना यह दर्शाता है कि आंदोलन सफल रहा है।
हिम्मत है तो गिरफ्तार करके दिखाओ!
आदित्य ठाकरे ने कहा कि अब हर नागरिक समझ चुका है कि उसका वोट चोरी हुआ है। इसी लिए केंद्र की भाजपा सरकार डरी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि देशभक्ति के लिए हमारे खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाते हैं, तो हमें इसकी परवाह नहीं है। हिम्मत है तो हमें गिरफ्तार करके दिखाओ। उन्होंने आरोप लगाया कि कल शिवसेना भवन में भी घुसने का प्रयास किया गया था, जिसका शिवसैनिकों ने जोरदार जवाब दिया।
जनता के लुप्त हुए अधिकारों को खोजने निकला हूं – तेजस ठाकरे
इस आंदोलन में तेजस ठाकरे की प्रत्यक्ष उपस्थिति भी चर्चा का विषय रही। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि जानवरों की दुर्लभ प्रजातियों की खोज करने वाले तेजस ठाकरे को इस आंदोलन में क्या दुर्लभ चीज मिली? इस पर तेजस ठाकरे ने व्यंग्यात्मक जवाब देते हुए कहा कि भाजपा के शासन में देश के नागरिकों के अधिकार ही दुर्लभ हो गए हैं। उन्हीं अधिकारों को खोजने के लिए मैं इस आंदोलन में उतरा हूं। जब तक उन्हें खोज नहीं लेता, तब तक आंदोलन नहीं रुकेगा।
बैलेट के पक्ष में मतों की बौछार,ईवीएम के पक्ष में महज चार वोट
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने मांसाहेब मीनाताई ठाकरे की प्रतिमा के पास हस्ताक्षर अभियान चलाया। इस अभियान में मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने भी हिस्सा लिया और हस्ताक्षर किए। इसके बाद शर्मिला ठाकरे, मनसे नेता अमित ठाकरे और उर्वशी ठाकरे ने भी हस्ताक्षर किए।
इस दौरान लोगों से पूछा गया कि वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) चाहते हैं या बैलेट से मतदान। आयोजकों के अनुसार, लोगों ने बैलेट पेपर वाली पेटी में बड़ी संख्या में वोट डाले, जबकि ईवीएम वाली मतपेटी में केवल चार वोट पड़े। अमित ठाकरे ने बताया कि हस्ताक्षर अभियान और मतदान के आंकड़े राज्य सरकार तथा केंद्र सरकार को भेजे जाएंगे।
कितनी भी धाराएं लगा दो, सीने पर लगाकर घूमेंगे – अमित ठाकरे
जब अमित ठाकरे से पूछा गया कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से क्या हासिल होगा, तो उन्होंने कहा कि इस्तीफे से अधिकारियों में डर पैदा होता है और दूसरे अधिकारी भ्रष्टाचार करने का साहस नहीं करते। उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ खड़े रहने पर हमारे खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। धाराएं लगाई गर्इं तो हम इसे छाती पर अपमान के साथ लगाकर घूमेंगे।
एफआईआर दर्ज करके आंदोलन नहीं रोका जा सकता – वरुण सरदेसाई
शिवसेना विधायक वरुण सरदेसाई ने कहा कि देश का निर्वाचन आयोग किसी एक राजनीतिक दल का नहीं होना चाहिए। यदि ज्ञानेश कुमार ने गलत किया है, तो उन्हें इस्तीफा देना ही होगा। वरुण सरदेसाई ने चेतावनी दी कि एफआईआर दर्ज करके या गिरफ्तारियां करके इस आंदोलन को रोका नहीं जा सकता।
जनता का सड़कों पर उतरना ही असली याचिका – अनिल देसाई
शिवसेना नेता और सांसद अनिल देसाई ने कहा कि अब जनता ही सड़कों पर उतर आई है। इसलिए सरकार की कोई भी बहानेबाजी अब नहीं चलेगी। देश की जनता आज सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने की सीमा से भी आगे निकल चुकी है और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आई है। इस आंदोलन में शिवसेना नेता एवं विधायक अनिल परब, विधायक महेश सावंत, नितिन देशमुख, हारून खान, नगरसेविका श्रद्धा जाधव, पूर्व विधायक विलास पोतनीस, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता बाला नांदगांवकर, नगरसेवक यशवंत किल्लेदार और संदीप देशपांडे सहित कई नेता शामिल हुए।

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