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काम के दबाव में सायन अस्पताल के डॉक्टर ने दी जान

– काम का अधिक दबाव और स्टाफ की कमी से जूझ रहा अस्पताल
-रेजिडेंट डॉक्टरों का फूटा गुस्सा, सिस्टम पर उठे सवाल

द्रुप्ति झा / मुंबई

सायन अस्पताल में काम के अत्यधिक दबाव और तनाव के चलते एक युवा रेजिडेंट डॉक्टर द्वारा आत्महत्या किए जाने की हृदयविदारक घटना ने मुंबई मनपा के स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलकर रख दी है। केईएम अस्पताल में हाल ही में एचएमआईएस डैशबोर्ड जैसी तकनीकी और कागजी समीक्षाओं के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मनपा के अस्पतालों में स्टाफ की भारी कमी और अमानवीय कामकाजी माहौल के कारण डॉक्टर २४ से ३६ घंटे तक बिना विश्राम के काम करने को मजबूर हैं। इस त्रासद घटना के बाद सायन अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों का गुस्सा फूट पड़ा है और उन्होंने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए तत्काल कड़े कदम उठाने की मांग की है। एक तरफ मनपा के अधिकारी और नेता एयर-कंडीशंड कमरों में बैठकर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के ढोल पीट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अस्पताल चलाने वाले डॉक्टर ही सिस्टम की चक्की में पिसकर अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि काम के घंटे तय करने और खाली पदों पर तुरंत भर्ती करने जैसी मांगें नहीं मानी गर्इं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर मामले में प्रशासन केवल जांच का दिखावा करता है या सचमुच स्वास्थ्य व्यवस्था की इस सड़ी-गली प्रणाली में सुधार के लिए कोई ठोस कदम उठाता है।

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