सामना संवाददाता / मुंबई
कुर्ला–ट्रॉम्बे रेल मार्ग के किनारे ३,७६२ झोपड़ों को नए बेदखली नोटिस देने की तैयारी। हाई कोर्ट ने पुनर्वास के विकल्प तलाशने और छह महीने तक `२,००० मासिक अंतरिम सहायता देने को कहा।
कुर्ला–ट्रॉम्बे रेलवे लाइन के किनारे बसे हजारों परिवारों के सामने घर खाली करने का संकट फिर खड़ा हो गया है। मध्य रेलवे इस सप्ताह ३,७६२ अनधिकृत झोपड़ों के निवासियों को नए नोटिस जारी करने की तैयारी में है। कार्रवाई रेलवे सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विस्तार की जरूरतों के आधार पर प्रस्तावित है।
मुंबई हाई कोर्ट ने कार्रवाई के साथ प्रभावित परिवारों की सहायता और पात्र निवासियों के पुनर्वास पर विचार करने के निर्देश भी दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छह महीने तक `२,००० प्रतिमाह अंतरिम आर्थिक सहायता की व्यवस्था की जानी है। इससे पुनर्वास का प्रश्न समाप्त नहीं होता; वैकल्पिक आवास के लिए पात्रता, दस्तावेजों और संबंधित एजेंसियों की प्रक्रिया निर्णायक रहेगी।
रेलवे का कहना है कि झोपड़े पटरी और ऊपर की बिजली की तारों के बेहद करीब हैं। इस मार्ग से पेट्रोलियम पदार्थों सहित मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। संबंधित जमीन सीएसएमटी-कुर्ला की पांचवीं और छठी रेलवे लाइन के लिए भी आवश्यक बताई गई है।
घर खाली करने की समयसीमा पर प्रकाशित खबरों में अंतर है। एक रिपोर्ट में रेलवे अधिकारी ने ३० दिन बताए हैं, जबकि उसी खबर में उद्धृत प्रस्तावित नोटिस में सात दिन का उल्लेख है। इसलिए वास्तविक नोटिस और अदालती निर्देशों के अनुरूप समयसीमा स्पष्ट करना जरूरी होगा। प्रभावित परिवारों के लिए सबसे बड़ा प्रश्न यही है-घर हटने और पुनर्वास मिलने के बीच वे कहां रहेंगे?
सुरक्षा और विकास के नाम पर हटेंगे झोपड़े
मध्य रेलवे के अनुसार, कुर्ला–ट्रॉम्बे रेल मार्ग के किनारे बसे झोपड़े पटरियों और बिजली की तारों के बेहद करीब हैं। यहां पेट्रोलियम पदार्थों की मालगाड़ियां भी गुजरती हैं। पांचवीं और छठी रेलवे लाइन के विस्तार के लिए भी जमीन जरूरी बताई गई है।
