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समर कैंप में बच्चे सीख रहे हैं बिहार, त्रिपुरा और बंगाल के लोकनृत्य

अनिल मिश्र / पटना

बिहार बाल भवन किलकारी, गया के गेवाल बिगहा परिसर में 1 जून से 20 जून तक आयोजित समर कैंप “चक धूम-धूम” में बच्चों को देश की विविध लोक संस्कृति से परिचित कराया जा रहा है। कैंप में लगभग 100 बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभिन्न राज्यों के लोकनृत्यों का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। नृत्य प्रशिक्षक गौतम कुमार गोलू बच्चों को बिहार का प्रसिद्ध झिझिया नृत्य, त्रिपुरा का पारंपरिक होजागिरी नृत्य तथा बंगाल का बंगला लोकनृत्य सिखा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को नृत्य की बारीकियों के साथ-साथ संबंधित राज्यों की संस्कृति और परंपराओं की भी जानकारी दी जा रही है।कैंप में बच्चों का उत्साह देखते ही बनता है। विभिन्न आयु वर्ग के बच्चे एक साथ प्रशिक्षण लेकर अपनी कला को निखार रहे हैं। लोकनृत्यों के माध्यम से बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सांस्कृतिक समझ का विकास हो रहा है। प्रमंडल कार्यक्रम समन्वयक राजीव रंजन श्रीवास्तव एवं सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया कि समर कैंप का उद्देश्य बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ते हुए उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन में बच्चों की भागीदारी महत्वपूर्ण है।
समर कैंप के माध्यम से बच्चे न केवल नृत्य सीख रहे हैं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी करीब से जान और समझ रहे हैं। नृत्य पर शिक्षक गौतम कुमार गोलू ने बताया कि लोक नृत्य हमारी संस्कृति विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनके माध्यम से बच्चों को देश की विविधता संस्कृति और परंपराओं की जानकारी मिलती है! समर कैंप में नृत्य के साथ साथ संगीत चित्रकला नाटक करते, क्राफ्ट और अन्य गतिविधियों का भी प्रशिक्षण लगातार दिया जा रहा है, अभी भी बच्चे जुड़ रहे हैं। लगातार रजिस्ट्रेशन चल रहा है। 15 जून तक रजिस्ट्रेशन चलता रहेगा।

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