मुख्यपृष्ठविश्वचीन ने बदल दिया तेल का पूरा खेल!

चीन ने बदल दिया तेल का पूरा खेल!

-युद्ध के बीच दुनिया के सबसे बड़े खरीदार ने तेल आयात २३ फीसदी घटाया, पुराने स्टॉक से चलाई अर्थव्यवस्था
-१.४ अरब बैरल का भंडार, अब सऊदी-ईरान पर निर्भर नहीं रहा ड्रैगन

दुनिया जब ईरान-इजरायल युद्ध के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका और तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता से जूझ रही है, तब चीन ने तेल बाजार का गणित काफी हद तक बदल दिया है। बड़े रणनीतिक भंडार, विशाल रिफाइनिंग क्षमता और वैकल्पिक ऊर्जा के विस्तार के दम पर चीन ने तेल आपूर्ति में अपनी निर्भरता का जोखिम कम किया है।
अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चुपचाप १.२ से १.४ अरब बैरल का रणनीतिक तेल भंडार तैयार कर लिया है। यह करीब १०९ से १२० दिनों के आयात के बराबर है। यही विशाल भंडार आपूर्ति संकट के दौरान चीन के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच बन सकता है।
मार्च से जुलाई के बीच जब ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत ११६ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, तब चीन ने कच्चे तेल का आयात २३ फीसदी घटा दिया और अपने पुराने स्टॉक में से करीब १४.७ करोड़ बैरल तेल का इस्तेमाल किया। इससे वैश्विक बाजार में मांग का दबाव कम हुआ और चीन को ऊंची कीमतों के असर को सीमित करने में मदद मिली।
रणनीति के तीन प्रमुख स्तंभ
१. टीपॉट रिफाइनरियां
शेडोंग प्रांत की छोटी निजी रिफाइनरियां चीन की कुल रिफाइनिंग क्षमता में करीब २५ फीसदी हिस्सेदारी रखती हैं। ये अपेक्षाकृत सस्ता प्रतिबंधित ईरानी और रूसी तेल खरीदती हैं। भुगतान और आपूर्ति के लिए शैडो फ्लीट तथा चीन की सीमा-पार भुगतान प्रणाली सीआईपीएस जैसे माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था में बड़ी सरकारी तेल कंपनियों की तुलना में छोटी रिफाइनरियां अधिक जोखिम उठाती हैं।
२. रणनीतिक भंडार बढ़ाना
चीन ने रूस से पाइपलाइन के जरिए तेल आयात में करीब ४० फीसदी की वृद्धि की। इसके अलावा ईरानी तेल की समुद्र में मौजूद खेपों को भी संभावित आपूर्ति संकट के लिए बफर के रूप में इस्तेमाल किया गया। इस तरह चीन ने तत्काल आपूर्ति बाधित होने की स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा तैयार की।
३. तेल पर निर्भरता घटाना
इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर ऊर्जा और हाईस्पीड रेल के तेजी से विस्तार ने चीन की तेल खपत पर दबाव कम किया है। चीन अब भी अपनी जरूरत का करीब ७५ फीसदी तेल आयात करता है, लेकिन ऊर्जा के स्रोतों में विविधता बढ़ने से मध्य-पूर्वी आपूर्ति पर उसका जोखिम भारत और जापान जैसे बड़े एशियाई खरीदारों की तुलना में अलग स्थिति में है।
विशेषज्ञ इस रणनीति को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की २०२१ में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की नीति से जोड़कर देखते हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन का यह रणनीतिक भंडारण ताइवान संकट जैसे संभावित बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने की उसकी तैयारी की झलक भी देता है।

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