-विदाई से पहले बप्पा की करें उत्तर पूजा; सम्मानपूर्वक प्रतिमा उठाकर लगाएं ‘पुढच्या वर्षी लवकर या’ की पुकार
गणेशोत्सव के समापन पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। कोई श्रद्धालु डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिन बाद विसर्जन करता है, जबकि सार्वजनिक मंडलों और अनेक परिवारों में अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति को विदाई दी जाती है।
विसर्जन का अर्थ भगवान का अंत नहीं, बल्कि साकार प्रतिमा का पंचतत्व में विलय है। भक्त उनसे अगले वर्ष पुनः आने की प्रार्थना करते हैं।
विसर्जन से पहले उत्तर पूजा
जिस स्थान पर गणपति की स्थापना की गई हो, वहां साफ-सफाई करके पूजा की सामग्री रखें। परिवार के सभी सदस्य स्वच्छ वस्त्र पहनकर बप्पा के सामने बैठें।
सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। श्रीगणेश को चंदन, कुमकुम, अक्षत, दूर्वा और पुष्प अर्पित करें। इसके बाद मोदक, लड्डू, फल अथवा घर में बने सात्त्विक पकवानों का भोग लगाएं।
पूजा के समय इस मंत्र का जाप किया जा सकता है—
ॐ गं गणपतये नमः।
इसके बाद गणपति अथर्वशीर्ष, संकटनाशन गणेश स्तोत्र अथवा श्रीगणेश चालीसा का पाठ करें। परिवार सहित भगवान श्रीगणेश की आरती उतारें और उनसे पूजा के दौरान हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
विदाई की प्रार्थना
हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना करें—
‘हे विघ्नहर्ता! आपने हमारे घर आकर इसे पवित्र किया। पूजा में हमसे जाने-अनजाने जो त्रुटि हुई हो, उसे क्षमा करें। हमारे परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखें और अगले वर्ष पुनः पधारें।’
इसके बाद प्रतिमा को थोड़ा आगे खिसकाया जाता है। यह प्रतीक है कि स्थापित देवता को विसर्जन के लिए विधिवत विदा किया जा रहा है। गणपति के साथ रखे नारियल, पान-सुपारी, पुष्प और कुछ पूजन सामग्री भी सम्मानपूर्वक उठाएं।
प्रतिमा उठाने का विधान
प्रतिमा को सीधे सिंहासन से उठाकर जल्दबाजी में बाहर न ले जाएं। पहले उसे स्वच्छ चौकी या लकड़ी के पाट पर रखें। भगवान का मुख घर की ओर रखते हुए परिवार के सदस्य उनका अंतिम दर्शन करें।
गणपति की मूर्ति उठाते समय जयकारा लगाएं—
गणपति बप्पा मोरया!
मंगलमूर्ति मोरया!
पुढच्या वर्षी लवकर या!
विसर्जन की विधि
प्रतिमा को स्वच्छ वाहन अथवा हाथों में सुरक्षित रूप से विसर्जन स्थल तक ले जाएं। मार्ग में भजन और गणपति के जयकारे लगाए जा सकते हैं, लेकिन ध्वनि, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था का ध्यान रखें।
विसर्जन स्थल पर पुनः आरती करें। भगवान को पुष्प और दूर्वा अर्पित करके तीन बार प्रतिमा को जल का स्पर्श कराएं। इसके बाद सम्मानपूर्वक विसर्जित करें। प्रतिमा को ऊपर से फेंकना या क्षतिग्रस्त करना उचित नहीं है।
घर में छोटी प्रतिमा हो तो स्वच्छ टब या बड़े पात्र में भी विसर्जन किया जा सकता है। प्रतिमा पूरी तरह घुलने के बाद उस जल को किसी पौधे अथवा स्वच्छ मिट्टी में अर्पित करें।
पर्यावरण का रखें ध्यान
मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी प्रतिमा का ही विसर्जन करना बेहतर है। प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक, थर्मोकोल, रासायनिक रंग, कपड़े और सजावटी वस्तुएं जल में न डालें। निर्माल्य को अलग एकत्र कर खाद बनाने या स्थानीय निकाय के निर्माल्य-कलश में डालने की व्यवस्था करें।
विसर्जन के बाद घर लौटकर परिवार के सदस्य भगवान श्रीगणेश का स्मरण करें और प्रसाद ग्रहण करें। गणेश विसर्जन का मूल संदेश यही है—जो आया है उसका स्वरूप बदलेगा, लेकिन श्रद्धा और ईश्वर का आशीर्वाद सदैव हमारे साथ रहेगा।
