सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई मनपा द्वारा संचालित कूपर अस्पताल में आठ करोड़ रुपए खर्च कर स्थापित किया गया सेंट्रल स्टरलाइजेशन सर्विस डिपार्टमेंट प्रोजेक्ट पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा धूल खा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस प्रोजेक्ट की ऐसी हालत होने के बावजूद यांत्रिक व विद्युत विभाग द्वारा लगभग २० करोड़ रुपए खर्च कर फिर से यही प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए नया टेंडर जारी किया गया है। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि अधिकारी अपने पसंदीदा ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर करदाताओं के पैसों की बर्बादी कर रहे हैं। इस मामले में उचित जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग शिवसेना ने मनपा आयुक्त से की है।
कूपर अस्पताल में वर्ष २०२४ में करीब ८ करोड़ रुपए खर्च कर केंद्रीय निर्जंतुकीकरण सेवा विभाग परियोजना शुरू की गई थी। इसके लिए यांत्रिकी व विद्युत विभाग ने बिना किसी विभागाध्यक्ष की मांग के ही निविदा जारी की थी। हालांकि, परियोजना के लिए जरूरी रासायनिक द्रव्य खरीदे बिना ही यह टेंडर जारी कर दिया गया। परिणामस्वरूप आवश्यक सामग्री के अभाव में यह प्रोजेक्ट पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रोजेक्ट बंद होने के बावजूद वहां तैनात कर्मचारियों का वेतन प्रशासन द्वारा ठेकेदार को नियमित रूप से दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों से बिना किसी लाभ के महानगर पालिका का पैसा खर्च किया जा रहा है। शिवसेना का आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने अपने पसंदीदा ठेकेदारों के साथ मिलकर अब यही प्रोजेक्ट केईएम अस्पताल में शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए १५ से २० करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है। शिवसेना नगरसेवक सचिन पडवल ने सवाल उठाया है कि केईएम अस्पताल के हर विभाग में पहले से अलग-अलग निर्जंतुकीकरण विभाग मौजूद हैं, तो फिर नए प्रोजेक्ट की जरूरत क्या है?
दोषियों पर मामला
दर्ज करने की मांग
सचिन पडवल ने कहा कि कूपर अस्पताल में जिस तरह की गलती हुई थी, वही गलती फिर से यांत्रिकी व विद्युत विभाग द्वारा दोहराई जा रही है। उन्होंने मांग की कि आयुक्त कूपर अस्पताल में लगाए गए प्रोजेक्ट की गुणवत्ता की जांच करें और यह भी पता लगाया जाए कि अब तक इस प्रोजेक्ट का कितना उपयोग हुआ है। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए, अन्यथा कूपर अस्पताल की तरह केईएम अस्पताल में प्रस्तावित यह प्रोजेक्ट भी धूल खाता रह जाएगा।
