मुख्यपृष्ठस्तंभछह दिन में १० मौतें...क्या मुंबई मानसून के लिए सचमुच तैयार थी?

छह दिन में १० मौतें…क्या मुंबई मानसून के लिए सचमुच तैयार थी?

मुंबई में मानसून हर साल आता है, चेतावनियां भी हर साल जारी होती हैं, नाला-सफाई, पेड़ छंटाई, जर्जर इमारतों की जांच और आपदा प्रबंधन की तैयारियों के दावे भी हर साल किए जाते हैं। लेकिन ३० जून से ५ जुलाई २०२६ के बीच महज छह दिन में १० मौतों ने एक बार फिर यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मुंबई सचमुच मानसून से निपटने के लिए तैयार थी।
३० जून को चेंबूर में ११ वर्षीय विहान श्रीवास्तव की पेड़ गिरने से मौत हुई। रिपोर्टों के अनुसार, जिस पेड़ के गिरने से यह हादसा हुआ, उसके आसपास सड़क कार्य से जड़ों को नुकसान पहुंचने की चेतावनी पहले ही संबंधित विभागों के बीच सामने आई थी। इसके बाद बीएमसी ने एम-वेस्ट वार्ड के असिस्टेंट गार्डन सुपरिंटेंडेंट को निलंबित किया। यह कार्रवाई अपने आप में बताती है कि मामला केवल ‘प्राकृतिक आपदा’ नहीं था, बल्कि निगरानी और समन्वय की कमी भी थी। २ जुलाई को साकीनाका के खैरानी रोड पर असलम शेख की खुले मैनहोल में गिरकर मौत हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, वहां ड्रेनेज/नाला मरम्मत का काम चल रहा था और मैनहोल खुला था। इस घटना के बाद बीएमसी ने चार अधिकारियों को निलंबित किया।
मौत के बाद ही निलंबन पर सवाल
सवाल यह है कि क्या निलंबन मौत के बाद ही होगा? खुले मैनहोल के आसपास बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रात में लाइट और निगरानी जैसी बुनियादी सावधानियां पहले क्यों नहीं थीं? ४ जुलाई को गोरेगांव पूर्व के आरे कॉलोनी क्षेत्र में १८ वर्षीय युवक की पेड़ की शाखा गिरने से मौत हो गई। वह बाइक से जा रहा था, तभी बारिश के बीच शाखा टूटकर उस पर गिरी। यह घटना बताती है कि मुंबई में पेड़ केवल पर्यावरण का विषय नहीं रहे, बल्कि खराब वृक्ष-निरीक्षण, कमजोर जड़ों और अनियोजित निर्माण के कारण नागरिक सुरक्षा का गंभीर सवाल बन चुके हैं। ५ जुलाई को कुर्ला पश्चिम में ६३ वर्षीय युनुस कुंडावाला की मौत एक बड़े पेड़ की शाखा दुकान पर गिरने से हुई। उन्हें मलबे से निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसी दिन मानखुर्द के जनता नगर में बहुमंजिला चॉल गिरने से छह लोगों की मौत हो गई और एक व्यक्ति घायल हुआ। यानी एक ही दिन में सात मौतों ने मुंबई मनपा की मानसून तैयारी की पोल खोल दी।
मुंबई मनपा की असली परीक्षा
इन दस मौतों की तारीखवार तस्वीर भयावह है, ३० जून को चेंबूर में ११ वर्षीय बच्चा, २ जुलाई को साकीनाका में खुले मैनहोल में असलम शेख, ४ जुलाई को आरे कॉलोनी में १८ वर्षीय युवक, ५ जुलाई को कुर्ला में युनुस कुंडावाला और उसी दिन मानखुर्द में चॉल गिरने से छह लोग। इनमें पेड़ गिरना, मैनहोल खुला रहना और जर्जर/कमजोर ढांचे का गिरना, तीनों घटनाएं ऐसी हैं, जिन्हें केवल ‘भारी बारिश’ कहकर टाला नहीं जा सकता। बेशक, इस बार बारिश असाधारण रही। लेकिन यही तो मुंबई की असली परीक्षा है।

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