-अंबरनाथ नगर परिषद की नई इमारत हुई जर्जर
-२ साल में ही छत से लीकेज, दीवारों पर सीलन, प्लास्टर गिरा
-उच्चस्तरीय जांच की मांग
लोग इस ३५ करोड़ के घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। समाजसेवी प्रवीण गोसावी ने महायुति सरकार से जांच कर दोषियों को सजा देने की मांग की है। गोसावी ने सवाल उठाया है कि शिंदे गुट-भाजपा के दर्जनों नगरसेवक, विधायक और पदाधिकारी रोज मुख्यालय में आते हैं, फिर इमारत की दुर्दशा देखकर आवाज क्यों नहीं उठा रहे? कहीं ठेकेदार और अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ तो नहीं है?
अनिल मिश्रा / अंबरनाथ
अंबरनाथ नगर परिषद द्वारा करीब ३५ करोड़ रुपए की लागत से बनाई गई नई भव्य प्रशासकीय इमारत अब अपनी बदहाली के कारण चर्चा में है। आरोप है कि निर्माण बेहद घटिया किया गया है और ठेकेदार ने निर्माण के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया है। अब इस मामले की पोल खुल गई है और ठेकेदार को सजा देने की मांग उठ रही है। नगर परिषद की प्रशासकीय इमारत को बने दो साल भी नहीं हुए हैं कि इसमें लीकेज शुरू हो गया है।
बेहद आधुनिक तकनीक से बनी बताई जा रही इस इमारत की छत उद्घाटन के दो साल के भीतर ही जगह-जगह से टपकने लगी है। इस मानसून में छत से पानी टपकने के कारण अंदर के लाखों रुपए के महंगे सजावट और फर्नीचर पूरी तरह खराब हो गए हैं। कई जगह इंटीरियर के हिस्से गिर गए हैं, दीवारें काली पड़ गई हैं। आशंका है कि एक-दो मानसून और झेलने पर इमारत के इंटीरियर का बड़ा हिस्सा गिर पड़ेगा। इमारत की दीवारों पर भारी सीलन आ गई है और कई जगहों का प्लास्टर उखड़ कर गिर रहा है। इससे छत का कोई हिस्सा गिरने और बड़ा हादसा होने का डर अधिकारियों और कर्मचारियों में बना हुआ है। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद भी इमारत तकनीकी रूप से सुरक्षित नहीं है। आरोप है कि फायर सेफ्टी जैसी जरूरी वैधानिक मंजूरियों के बिना ही इसका इस्तेमाल हो रहा है। दुर्घटना होने से बचाने के लिए इमारत की जांच जरूरी है। इस पूरे मामले में प्रशासन की लापरवाही और ठेकेदार के घटिया काम को लेकर स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है।
