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प्रशिक्षित जवानों को बताया ‘अकार्यक्षम’, निजी ‘चाकरों’ के लिए बिछाया रेड कारपेट!

-अजब मनपा का गजब खेल
-राज्य के अति-संवेदनशील जगहों की सुरक्षा के लिए पहली पसंद होते हैं एमएसएफ जवान

सुरेश गोलानी / मुंबई
भाजपा शासित मीरा-भायंदर मनपा द्वारा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा और विवादास्पद निर्णय लिया गया है। मनपा की महासभा में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसके तहत वर्तमान में तैनात कुल ४४२ महाराष्ट्र राज्य सुरक्षा महामंडल (एमएसएफ) के प्रशिक्षित जवानों में से ३३३ जवानों को हटाकर उनकी जगह सुरक्षा का जिम्मा निजी सुरक्षा एजेंसी को सौंपने का फैसला लिया गया है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इस प्रस्ताव को विपक्षी दलों का भी समर्थन प्राप्त है।
एमएसएफ के जवान पुलिस की तरह ही प्रशिक्षित और कुशल होते हैं। एक तरफ जहां सरकार ने एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, अस्पतालों और थर्मल पावर प्लांट जैसी अति-संवेदनशील और महत्वपूर्ण जगहों पर एमएसएफ के जवानों को ही पहली पसंद माना जाता है, वहीं सत्ताधारियों द्वारा उन्हें ‘अकार्यक्षम’ बताकर हटा देना सीधे तौर पर किसी ‘खास’ ठेकेदार को फाइदा पहुंचाकर करोड़ों रुपये के घोटाले कट-कमीशन और सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
मोटे कमीशन का लालच
एमएसएफ के जवान अपने कर्तव्य के प्रति वफादार होते हैं और किसी नेता की जी-हुजूरी नहीं करते। इसके विपरीत निजी एजेंसी के गार्ड मनपा की संपत्तियों की सुरक्षा करने के बजाय नेताओं और रसूखदार अधिकारियों के घरों, निजी दफ्तरों और फार्म हाउस पर चाकरी करने में लगे रहते हैं। यही वजह है कि नेताओं को एमएसएफ के जवान खटकते हैं और वे निजी एजेंसियों को लाना चाहते हैं, ताकि उनके गार्ड्स से मनमर्जी का काम करने के अलावा ठेकेदार से मोटा कमीशन भी वसूला जा सके।

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