-एमपीएससी, एफडीए के बाद अब पीएमसी की परीक्षा पर भी सवाल
-कथित पेपर लीक को लेकर एनसीपी का हमला; मेहबूब शेख बोले-‘परीक्षा रद्द करो, जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई’
सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। एमपीएससी और एफडीए की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद अब पुणे महानगरपालिका (पीएमसी) की भर्ती परीक्षा भी सवालों के घेरे में आ गई है। पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के युवा प्रदेशाध्यक्ष मेहबूब शेख ने महायुति सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
शेख ने आरोप लगाया कि एमपीएससी की एक परीक्षा में एक अभ्यर्थी तक पेपर पहुंचने की घटना सामने आने के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई, जबकि पीएमसी की परीक्षा में कथित तौर पर तीन अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंचने की बात सामने आने के बावजूद पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय केवल संबंधित नियुक्तियां रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि दोनों मामलों में अलग-अलग मापदंड क्यों?
एमपीएससी से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर शेख ने कुछ अभ्यर्थियों की रैंकिंग का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि सुनील गाढवे की पत्नी पायल लांडे की एफडीए की केमिकल एनालिसिस परीक्षा में रैंक करीब १०,२७० थी, जबकि कथित तौर पर अधिक कठिन ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में उनकी रैंक ३१वीं हो गई। इसी तरह ऋतुजा पाटील के संबंध में शेख ने दावा किया कि फार्मासिस्ट ग्रुप-सी परीक्षा में उनकी रैंक २१,२२२ थी, जबकि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा में वह कथित तौर पर ७वीं रैंक पर पहुंच गईं।
सरकार चुप क्यों?
मेहबूब शेख के मुताबिक, पीएमसी में स्थापत्य अभियंता पद के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के दौरान कथित तौर पर पेपर हल करते हुए एक फोटो वायरल हुआ। इसके बाद मनपा की ओर से परीक्षा में पेपर लीक होने की बात स्वीकार किए जाने का दावा किया गया। शेख ने सवाल किया कि यदि परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई है और उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं, तो केवल तीन लोगों पर कार्रवाई करके बाकी परीक्षा को निष्पक्ष वैâसे माना जा सकता है?
