-असली नहीं बने तो नकली अफसर बन रहे हैं बेरोजगार युवक
-कई कंपनी मालिकों से की वसूली
-आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
-२६ अगस्त को सुबह करीब १० बजे जब आरोपी दोबारा कंपनी में पहुंचा तो पोवाले ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घोसालकर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उस पर धोखाधड़ी और फर्जी पहचान बताने का केस दर्ज किया है। पुलिस को उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। जांच की जा रही है कि क्या उसने इसी तरह अन्य फैक्ट्री मालिकों से भी वसूली की है।
सामना संवाददाता / मुंबई
बेरोजगारी का आलम यह है कि नौकरी नहीं मिलने से बेरोजगार युवक नकली अफसर बनकर कंपनी मालिकों से वसूली कर रहे हैं। पुलिस ने जब एक युवक को फर्जी अधिकारी के आरोप में गिरफ्तार किया तो पता चला कि उसने कई कंपनी मालिकों को कार्रवाई का डर दिखाकर पैसे ऐंठे हैं। वनराई पुलिस ने बदलापुर से २९ वर्षीय एक बेरोजगार युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) का अधिकारी बनकर एक फैक्ट्री मालिक से पैसे ऐंठने का आरोप है।
आरोपी की पहचान स्वराज घोसालकर के रूप में हुई है। उसने खुद को एमपीसीबी का फील्ड ऑफिसर सचिन महाडिक बताकर पैâक्ट्री मालिकों को प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के उल्लंघन पर गिरफ्तारी की धमकी दी थी। पुलिस के मुताबिक, आरोपी पढ़ा-लिखा होने के बावजूद बेरोजगार है। उसने फिल्म ‘स्पेशल २६’ से प्रेरणा लेकर यह वारदात की।
गोरेगांव-पूर्व स्थित विश्वेश्वर रोड के रहनेवाले शिकायतकर्ता शैलेश पोवाले (५२) कोठारी इंडस्ट्रीयल एस्टेट में लक्ष्मी मेटलर्जिकल एंड मरीन इंजीनियर्स नामक कंपनी के मालिक हैं। पोवाले ने पुलिस को बताया कि २५ अगस्त को दोपहर करीब १२.५३ बजे वह अपने केबिन में थे, तभी अकाउंटेंट ने बताया कि एमपीसीबी का एक अधिकारी उनसे मिलना चाहता है। पोवाले ने उससे केबिन में आकर पहचान पत्र दिखाने को कहा, लेकिन उसने आईडी की जगह विजिटिंग कार्ड दिखाया और कंपनी के खिलाफ प्रदूषण पैâलाने की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी दी। डर से पोवाले ने उसे १०,००० रुपये दे दिए। उसी रात करीब ९.१२ बजे आरोपी ने पोवाले को व्हॉट्सऐप कॉल कर और २५,००० रुपए की मांग की।
