मुख्यपृष्ठटॉप समाचारमोदी के २५ मंत्रियों का गिरेगा विकेट?

मोदी के २५ मंत्रियों का गिरेगा विकेट?

-कैबिनेट में बड़े ऑपरेशन की तैयारी; दो दर्जन से ज्यादा चेहरों के विभाग बदलने की चर्चा, कई दिग्गजों पर भी टिकी नजर
-नितिन गडकरी के हालिया बयान, जिसमें उन्होंने नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की बात कही, ने भी अटकलों को हवा दी, हालांकि उनके कार्यालय ने साफ किया कि इसे कैबिनेट फेरबदल या राजनीतिक संन्यास से जोड़ना गलत है।

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
नरेंद्र मोदी सरकार में बड़े फेरबदल की आहट अब तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार बदलाव केवल दो-चार मंत्रालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि करीब दो दर्जन या उससे ज्यादा मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं और कुछ चेहरों की छुट्टी भी हो सकती है।
अगस्त के तीसरे सप्ताह से लगातार ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा नेतृत्व २०२९ के लोकसभा चुनाव, आगामी राज्य चुनावों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल का नया खाका तैयार कर रहे हैं। यानी मोदी वैâबिनेट में अब सिर्फ फेरबदल नहीं, परफॉर्मेंस ऑडिट का मौसम है। भाजपा की नई संगठनात्मक टीम बनने के बाद सरकार में भी युवा चेहरों को आगे लाने की चर्चा है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों को प्रतिनिधित्व देने के साथ सहयोगी दलों की मांगों को भी साधना होगा।
नए चेहरे आएंगे तो पुराने जाएंगे कौन?
रिपोर्टों के मुताबिक करीब १२ नई जगहें उपलब्ध हो सकती हैं और दावेदारों की सूची काफी लंबी है। यहीं सबसे बड़ा सवाल उठता है कि अगर नए चेहरे आएंगे तो पुराने जाएंगे कौन? राजनीतिक चर्चा में कई वरिष्ठ मंत्रियों की उम्र, कार्यप्रदर्शन और भविष्य की भूमिका का आकलन किए जाने की बात कही जा रही है।
मोदी ३.० गठबंधन सरकार में कैंची चलाना आसान नहीं
एक-दूसरे से इस्तीफा मांगना सरकार के भीतर की दिखा रहा है खींचतान की झलक
मोदी ३.० गठबंधन सरकार है, इसलिए इस बार कैंची चलाना पहले जैसा आसान भी नहीं। सहयोगियों की अपनी सीटें हैं, अपनी मांगें हैं और अपनी राजनीतिक मजबूरियां। ऊपर से आज ही केंद्रीय मंत्रियों चिराग पासवान और जीतन राम मांझी का आरक्षण के मुद्दे पर एक-दूसरे से इस्तीफा मांगना सरकार के भीतर की खींचतान की झलक दिखा रहा है।
फेरबदल की टाइमिंग भी राजनीतिक है। २०२९ अभी दूर है, लेकिन भाजपा जानती है कि चुनावी मशीनरी वर्षों पहले चालू होती है। जिन मंत्रियों से वोट, प्रदर्शन या राजनीतिक संदेश नहीं निकल रहा, उनकी जगह नए सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण बैठाना चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इसलिए अब दिल्ली की सत्ता के गलियारों में एक ही सवाल घूम रहा है। भाजपा लंबे समय से आदिवासी समाज को अपने राजनीतिक विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बताती रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से लेकर आदिवासी कल्याण योजनाओं तक पार्टी ने इसे अपने बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में पेश किया है। लेकिन अब यही मोर्चा अंदरूनी बेचैनी का कारण बनता दिखाई दे रहा है। एक आदिवासी नेता के सार्वजनिक तेवरों ने भाजपा की उस तस्वीर पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें ऊपर से सब कुछ अनुशासित और एकजुट दिखाई देता है। मुद्दा केवल एक बयान का नहीं है। असली बात यह है कि भाजपा के भीतर ऐसे नेता भी आवाज उठाने लगे हैं जो अब तक सार्वजनिक तौर पर नेतृत्व की लाइन से अलग दिखाई नहीं देते थे। यही कारण है कि इस घटनाक्रम को सामान्य नाराजगी कहकर खारिज करना आसान नहीं है। भाजपा नेतृत्व लगातार दावा करता रहा है कि मोदी सरकार ने आदिवासी समाज को अभूतपूर्व सम्मान और विकास दिया है। अमित शाह ने भी मई में कहा था कि सरकार ने आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं और जनजातीय कल्याण बजट में बड़ी वृद्धि हुई है। लेकिन राजनीति केवल बजट और भाषण से नहीं चलती। सवाल प्रतिनिधित्व, निर्णय लेने की हिस्सेदारी और राजनीतिक सम्मान का भी है। जब किसी वर्ग के नेता यह महसूस करने लगें कि उन्हें केवल मंच पर सम्मान दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविक शक्ति-संतुलन कहीं और तय हो रहा है, तो असंतोष देर-सबेर बाहर आता ही है। यहीं मोदी-शाह मॉडल की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आती है अत्यधिक केंद्रीकरण।
मोदी के मंत्री जुएल ओराम बोले-छवि खराब करोगे तो हाथ काट दूंगा; मंत्रिमंडल से हटाने की साजिश का आरोप
भाजपा में सब कुछ अनुशासन और एकजुटता की तस्वीर जैसा नहीं है। केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम के ताजा बयान ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को खुली सड़क पर ला दिया है। ओराम ने आरोप लगाया है कि भाजपा में शामिल हुए कुछ लोग उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर करने, उनकी छवि खराब करने और उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटवाने की साजिश कर रहे हैं। और मंत्री जी का गुस्सा भी सामान्य नहीं है।
किसका मंत्रालय बचेगा, किसकी कुर्सी हिलेगी और किसका विकेट सीधे कैबिनेट से बाहर गिरेगा?
आधिकारिक सूची अभी सामने नहीं आई है, इसलिए ‘२५ मंत्रियों की छुट्टी’ की संख्या फिलहाल राजनीतिक अटकल है। लेकिन इतना साफ है कि मोदी सरकार का अगला वैâबिनेट फेरबदल छोटा नहीं दिख रहा और कई मंत्रियों के लिए आने वाले दिन रिपोर्ट कार्ड के दिन हैं।

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