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रोखठोक: आदिवासियों के अस्तित्व को नकारता महाराष्ट्र

संजय राऊत

जल, जंगल, जमीन किसकी?
आजादी के ८० साल बाद भी आदिवासियों के जीवन को स्थायित्व नहीं मिल सका है। उद्योगपतियों के मुनाफे के लिए आदिवासियों के अस्तित्व को ही नकारा जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री फडणवीस आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने में नाकारा साबित हुए हैं। आदिवासियों का सारा फंड लूटा जा रहा है। आखिर यह पैसा जा कहां रहा है? जल, जंगल और जमीन अब आदिवासियों की नहीं रही, बल्कि मोदी, शाह और फडणवीस के चहेते उद्योगपतियों की हो चुकी है।

महाराष्ट्र की सरकार ने गरीब-ग़ुरबा जनता पर वैâसा जुल्म ढा रखा है, यह बात अब आए दिन उजागर हो रही है। खासकर आदिवासी, दलित और पीड़ित बच्चों का अब कोई वली-वारिस नहीं बचा है। हैरानी की बात यह है कि जब भी इन मुद्दों पर कोई आवाज उठाता है या सवाल पूछता है, तो मुख्यमंत्री फडणवीस कह देते हैं, ‘यह सब कांग्रेस का पाप है। आश्रमशालाएं और ऐसी संस्थाएं कांग्रेस पदाधिकारियों की हैं।’ किसी भी हुक्मरान के मुंह से ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान शोभा नहीं देते। आप मौजूदा हुक्मरान हैं; इसलिए आज घटने वाली दुर्घटनाओं की जिम्मेदारी आपकी ही है, यह बात उन्हें नहीं भूलनी चाहिए। पुणे में राहुल गांधी ने छात्रों से संवाद साधा। कुछ आदिवासी लड़कियां उस मंच पर आईं और उन्होंने अपनी व्यथा सुनाई। दुर्गम इलाकों से आदिवासी बच्चे शहरों और तहसील मुख्यालयों में पढ़ने आते हैं, लेकिन उन्हें हॉस्टलों में जगह नहीं मिलती। अगर जगह मिल भी जाए, तो वह लड़कियों के लिए असुरक्षित है। नहाने, शौचालय और भोजन की सही व्यवस्था नहीं है। सोने के लिए बिस्तर नहीं हैं। उन्हें बेहद घटिया दर्जे का खाना मिलता है। खाने में कीड़े और इल्लियां मिलती हैं। उन्हें बाहर निकालकर उसी खाने से पेट की आग बुझानी पड़ती है। महाराष्ट्र राज्य में अत्यंत अमानवीय किस्म का जीवन इन बच्चों के नसीब आया है। जब श्री गांधी ने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस को पत्र लिखा, तो भाजपा के मंत्रियों ने उस पत्र और आदिवासियों के सवालों का मजाक उड़ाया तथा इसे ‘कांग्रेस का पाप’ घोषित कर दिया। श्री फडणवीस जिस विदर्भ क्षेत्र से आते हैं, उसी गढ़चिरौली की एक आश्रमशाला में सर्पदंश से तीन लड़कियों की मौत हो जाती है और भाजपा के लोग इस मुद्दे को भी एक ‘मजाक’ के रूप में लेते हैं। पुणे के आंबेगांव तालुका के एक आंगनवाड़ी स्कूल में बच्चों को मध्याह्न भोजन के लिए दिए गए अनाज कुकर की १३ सीटी आने के बाद भी नहीं पकते। वही कच्चा खाना खाकर बच्चे बीमार पड़ जाते हैं। इस पर मुख्यमंत्री फडणवीस की क्या राय है? आदिवासियों के लिए आने वाला फंड कौन हड़प रहा है? मंत्रिमंडल के आदिवासी मंत्री इन सब पर चुप हैं? आदिवासी बच्चों के मुंह का निवाला ये आदिवासी मंत्री ही छीनकर खा रहे हैं। धर्मराव अत्राम, नरहरी जिरवल और अशोक उइके, ये तीन आदिवासी मंत्री राज्य सरकार में हैं। इस हालात पर उनका क्या कहना है?
जमीनों पर अतिक्रमण
पूरे महाराष्ट्र में आदिवासियों की स्थिति ठीक नहीं है। उनकी जमीनों पर सरेआम अतिक्रमण चल रहा है। रायगड में आदिवासियों की ‘दली’ जमीनों पर खुला हमला हुआ और सरकार इन आदिवासियों की बात सुनने को तैयार नहीं है। मुरबाड़ से लेकर जुन्नर तक आदिवासियों के स्वामित्व वाली जमीनें अब अडानी के ऊर्जा प्रोजेक्ट के लिए कब्जाने की नीति फडणवीस चला रहे हैं। अडानी को अपने प्रोजेक्ट के लिए जंगल और आदिवासियों की जमीनें चाहिए। तो फिर आदिवासी कहां जाएं? मुरबाड़-जुन्नर के आदिवासी और किसान अपनी जमीनें बचाने के लिए सड़कों पर उतरे, तो उन पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का सिलसिला शुरू हो गया। यह आदिवासियों की एक पूरी पीढ़ी को ही तबाह करने की साजिश है। आदिवासियों के मुद्दे लेकर अगर कोई सरकार के दरबार में पहुंचता है, तो उनसे पूछा जाता है, ‘क्या तुम्हें ‘वंदे मातरम’ के छहों पद गाने आते हैं? अगर नहीं आते, तो तुम्हारी जमीनें चली जाएंगी’, ऐसी अजीबोगरीब धमकियां दी जाती हैं। पुरंदर हवाई अड्डे के लिए किसानों और आदिवासियों की जमीनें दहशत के बल पर कब्जाई जा रही हैं। पुरंदर का हवाई अड्डा जनता के फायदे का नहीं है। यहां देश-विदेश के कौन से विमान उतरेंगे और उससे किसानों का क्या फायदा होगा, इसका कोई खाका सरकार के पास नहीं है। महाराष्ट्र के ‘एमआईडीसी’ मंत्री सामंत सिर्फ जमीन अधिग्रहण के पीछे पड़े हैं, पर किसके लिए? यह सार्वजनिक संपत्ति का गबन है। एक उद्योगपति के फायदे के लिए यह लूट जारी है। गौतम अडानी किसी नए उद्योग का एलान करते हैं और सरकार तुरंत उनके लिए जबरन भूमि अधिग्रहण शुरू कर देती है। यह न्याय नहीं है? यह कौन सा कानून है? यह कौन सा लोकतंत्र है? असत्य और अनीति की बुनियाद पर फडणवीस की सरकार जैसे-तैसे टिकी हुई है। दिल्ली जाने पर दिखता है कि यह सरकार कभी भी गिर सकती है। भाजपा मंत्रियों के चेहरे चिंताग्रस्त नजर आते हैं। कृष्ण मेनन मार्ग पर देश के गृह मंत्री अमित शाह रहते हैं। उनके घर के आसपास के सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं और वहां सिर्फ सशस्त्र बलों का घेरा है। औरंगजेब जब दिल्ली में था, तब वह भी ऐसे ही घेरे में जीता था। अमित शाह और उनके लोगों को आखिर किससे इतना डर लग रहा है? किसानों और आदिवासियों को दिल्ली में आंदोलन करने नहीं दिया जाता, लेकिन युवा वर्ग ने जब इन लोगों की तानाशाही को दरकिनार कर दिल्ली को घेरा, तब से डरी हुई सरकार अब तक संभल नहीं पाई है।
गुब्बारा फूटा
देवेंद्र फडणवीस के प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व का गुब्बारा फूट चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने जब से उन्हें दिल्ली आने का न्योता दिया है, वे बेचैन हैं। अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की जगह योग्य व्यक्ति की तलाश प्रधानमंत्री कर रहे हैं, लेकिन भाजपा में काबिल लोग बचे ही नहीं हैं। इसका खामियाजा देश भुगत रहा है। बहरहाल, सरकार में चाहे कितने भी बदलाव हो जाएं, क्या राज्य के आदिवासियों के जीवन में उम्मीद की किरणें जगेंगी? यही असली सवाल है। ८० करोड़ लोगों को मोदी १० किलो मुफ्त अनाज देते हैं, जिनमें आदिवासी पाडे (बस्तियां) बड़ी संख्या में शामिल हैं। यह अनाज कितने घटिया दर्जे का है, यह अब महाराष्ट्र में साफ दिख गया है। इन सभी अनाज, स्कूली पोषण आहार और स्कूली सामान सप्लाई करने वाले ठेकेदारों की तिजोरियां भर रही हैं। वहीं आदिवासी जहां था, वहीं अपने जीने के लिए संघर्ष कर रहा है।
गढ़चिरौली के जंगलों और जमीनों पर खनन उद्योग को मंजूरी देकर भाजपा ने आदिवासियों के अस्तित्व को ही नकार दिया और आदिवासियों के राजनीतिक नेता भ्रष्टाचार के पैसों की लहर में बह गए। आदिवासियों का कोई खैरख्वाह नहीं है। उनका फंड सीधे लूटा जा रहा है। वह पैसा कहां जा रहा है, यह मुंबई की एक खबर से साफ हो जाता है। दादर-प्रभादेवी इलाके के ‘रुस्तमजी क्राउन’ नामक अति-अमीर टावर्स में जब बेहिसाब अवैध निर्माण और अतिक्रमण हुआ, तो मुंबई महानगरपालिका की टीम ने उस पर हथौड़ा चलाया। इस इमारत में किन लोगों के फ्लैट निकले? मंत्री संजय राठौड़, पूर्व मंत्री दीपक केसरकर और पूर्व विधायक सदा सरवणकर के। ऐसे कई लोगों के उस इमारत में हैं। यहां एक फ्लैट कम से कम २५ से ४० करोड़ रुपये का है और उसमें यह अनधिकृत निर्माण! एक तरफ सरकार के पास आदिवासियों के लिए फंड नहीं है, घर नहीं है, खाना नहीं है; लेकिन उनके हिस्से का पैसा प्रभादेवी के ‘रुस्तमजी क्राउन’ टावर्स में ये लोग ठिकाने लगा रहे हैं।
यह हेराफेरी और लूट महाराष्ट्र को हर दिन गर्त में धकेल रही है!

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