-३,४०० वोटर फॉर्म निजी फोटो
-कॉपी दुकान में कैसे पहुंचे; भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े सूरज पाटिल पर एफआईआर, ५ बीएलओ निलंबित
सामना संवाददाता / नवी मुंबई
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर महाराष्ट्र में ऐसा मामला सामने आया है जिसने चुनावी प्रक्रिया की गोपनीयता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नवी मुंबई के खारघर स्थित एक निजी फोटो कॉपी दुकान से करीब ३,४०० भरे हुए एसआईआर फॉर्म बरामद हुए हैं।
ये फॉर्म पनवेल विधानसभा क्षेत्र के ११ मतदान केंद्रों से संबंधित बताए गए हैं। मामला सामने आते ही प्रशासन ने पांच बूथ लेवल अधिकारियों को निलंबित कर दिया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।
भाजपा का पदाधिकारी निकला सूरज पाटिल!
मतदाता डेटा की समानांतर सूची तैयार करने की आशंका
पुलिस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर मामले में सूरज पाटिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। रिपोर्टों के मुताबिक, पाटिल भाजपा युवा मोर्चा की एक स्थानीय समिति से जुड़ा पदाधिकारी बताया गया है। आरोप है कि उसके पास ये फॉर्म अनधिकृत रूप से पहुंचे और उनका फोटो कॉपी कराया जा रहा था। एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा ३१४ और जनप्रतिनिधित्व कानून की संबंधित धारा के तहत दर्ज की गई है।
अब सवाल बेहद सीधा है। मतदाताओं की निजी जानकारी वाले हजारों सरकारी फॉर्म भाजपा से जुड़े एक व्यक्ति तक वैâसे पहुंचे? क्या बीएलओ ने खुद दिए? किसके निर्देश पर दिए? फॉर्म की प्रतियां क्यों बनाई जा रही थीं? उनका इस्तेमाल किस काम में होना था? क्या मतदाता डेटा की कोई समानांतर सूची तैयार की जा रही थी? यही वह जगह है जहां ‘एसआईआर में बड़ा खेल’ वाला आरोप राजनीतिक ताकत पकड़ता है। मामला शिवसेना कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद सामने आया। इसके बाद भाजपा और शिवसेना कार्यकर्ताओं के बीच टकराव भी हुआ।
फिर जनता पूछे तो क्या गलत है?
अगर फॉर्म सिर्फ फोटो कॉपी के लिए थे तो सरकारी व्यवस्था में क्यों नहीं थे? अगर निजी इस्तेमाल के लिए थे तो इस्तेमाल क्या था? और अगर सब सामान्य था तो पांच बीएलओ तत्काल सस्पेंड क्यों हुए? चुनाव में भरोसा केवल वोट डालने से नहीं बनता, बल्कि वोटर डेटा की सुरक्षा से भी बनता है। यह मामला अब केवल ३,४०० फॉर्म का नहीं है। यह सवाल है, वोटर लिस्ट की ‘सफाई’ चल रही थी या किसी और चुनावी तैयारी की कॉपी बन रही थी?
