-गणेशोत्सव से पहले ४ हजार शिकायतों ने खोली ‘सड़क विकास’ की पोल
सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई में गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। गणपति बाप्पा के स्वागत के लिए मंडप सज रहे हैं, मूर्तियों की बुकिंग और सजावट का काम जोर पकड़ रहा है। लेकिन इस उत्सवी माहौल के बीच मुंबई की सड़कों की बदहाल तस्वीर शहर के प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर रही है। गणेशोत्सव से पहले मुंबई महानगरपालिका के पास सड़कों की खराब स्थिति को लेकर करीब ४ हजार शिकायतें पहुंचना महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि शहर की सड़क व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का संकेत है।
बारिश में खुल जाती है विकास की ‘पोल’
मुंबई में सड़क और गड्ढों की समस्या कोई नई नहीं है। हर साल मानसून से पहले मनपा की ओर से सड़कों की मरम्मत, डांबरीकरण और गड्ढे भरने के दावे किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च किए जाने की बातें सामने आती हैं। लेकिन बारिश की कुछ तेज फुहारें पड़ते ही कई सड़कों पर डामर उखड़ने लगता है और गड्ढे फिर दिखाई देने लगते हैं। यही सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। अगर हर साल सड़कों की मरम्मत होती है तो बारिश के बाद वही सड़कें दोबारा क्यों टूटती हैं? सिर्फ गड्ढे भर देना सड़क सुधार नहीं है। सड़क की गुणवत्ता, निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, जलनिकासी व्यवस्था, संबंधित ठेकेदार की जवाबदेही और मरम्मत के बाद सड़क की टिकाऊ क्षमता पर भी निगरानी जरूरी है। जब तक इन पहलुओं पर कठोर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक गड्ढों का यह चक्र खत्म होना मुश्किल है। गणेशोत्सव मुंबई के लिए सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। हजारों गणेश मंडल सड़कों से होकर प्रतिमाएं लेकर जाते हैं। विसर्जन के दौरान भी बड़ी संख्या में वाहन और श्रद्धालु सड़कों पर उतरते हैं।
