हनीफ जवेरी
अक्सर लोग मानते हैं कि ‘एंग्री यंग मैन’ का खिताब सिर्फ अमिताभ बच्चन को मिला था और इसी छवि ने उन्हें सफलता की बुलंदियों तक पहुंचाया। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह उपाधि सबसे पहले उनके प्रतिद्वंद्वी शत्रुघ्न सिन्हा को दी गई थी। उस दौर में, जब न तो शत्रुघ्न सिन्हा फिल्मों में आए थे और न ही अमिताभ ने अपने करियर में कोई बड़ी सफलता हासिल की थी। समय के साथ `एंग्री यंग मैन’ की पहचान अमिताभ की छवि बन गई, लेकिन इस दिलचस्प सच से आज भी कई लोग अनजान हैं कि इस खिताब का पहला संबंध शत्रुघ्न सिन्हा से जुड़ा था। यही तथ्य हिंदी सिनेमा के इतिहास को और भी रोचक बना देता है।
जब अमिताभ बच्चन अपने करियर को बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब शत्रुघ्न सिन्हा ने पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से अभिनय में डिप्लोमा लिया था। एक बार बातचीत के दौरान उन्होंने अभिनय शिक्षक रोशन तनेजा को बताया कि वे मुंबई जाकर फिल्मों में हीरो बनने की कोशिश करेंगे। यह सुनकर तनेजा सहित वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े थे। रोशन ने उन्हें समझाया कि उनकी शक्ल हीरो जैसी बिल्कुल नहीं है। चूंकि उनके चेहरे पर घाव का एक गहरा निशान था, इसलिए उन्हें सलाह दी गई कि वे एक सफल खलनायक बन सकते हैं, क्योंकि उनके पास दमदार आवाज भी है। इंस्टीट्यूट के नियम के अनुसार, विद्यार्थियों की विदाई के समय उन पर आधारित १५ से २० मिनट की एक फिल्म बनाकर दी जाती थी, ताकि वे काम पाने के लिए उसे फिल्म निर्माताओं को दिखा सकें। यह फिल्म इंस्टीट्यूट के वे छात्र बनाते थे, जो वहां फिल्म निर्देशन की शिक्षा ले रहे होते थे। शत्रुघ्न पर किस तरह का किरदार जमेगा, इस बात को ध्यान में रखकर एच.शमशुद्दीन ने उनके लिए एक नकारात्मक भूमिका लिखी और शत्रुघ्न को लेकर १९ मिनट की अंग्रेजी फिलम ‘एंग्री यंग मैन’ निर्देशित की। इस फिल्म में शत्रुघ्न द्वारा किए गए एक के बाद एक कत्ल दिखाए गए और अंत में पुलिस की गोली से उनका अंत होते हुए बताया गया। इस फिल्म में उनके साथ उनकी ही एक्टिंग बैच की छात्रा जया भादुड़ी, डैनी डेन्जोंग्पा और रश्मि (जिन्होंने आगे चलकर अभिनेता अनिल धवन से विवाह किया) के अलावा बलराज और बाबा माजगांवकर ने भी काम किया। मजे की बात यह रही कि जिस ‘एंग्री यंग मैन’ बने शत्रुघ्न के साथ जया ने काम किया था, उन्हीं जया ने आगे चलकर ‘एंग्री यंग मैन’ का खिताब पाने वाले अमिताभ को अपने जीवनसाथी के रूप में चुना। पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट द्वारा प्रस्तुत अपनी फिल्म एंग्री यंग मैन लेकर शत्रुघ्न सिन्हा मुंबई आ गए और उनकी दोस्ती अभिनेता संजीव कुमार से हो गई। संजीव ने वही फिल्म अपने कई निर्माता मित्रों को दिखाई, जिनमें एल.वी. प्रसाद और बी.आर. इशारा भी शामिल थे। रोशन तनेजा की सलाह पर अमल करते हुए शत्रुघ्न ने नकारात्मक भूमिकाएं स्वीकार कीं, जिनमें खिलौना और गुलजार की फिल्म मेरे अपने भी शामिल थीं।
बतौर खलनायक शत्रुघ्न सिन्हा का करियर स्थापित हो गया था, लेकिन नायक बनने की इच्छा अब भी बरकरार थी। दोस्त और आ गले लग जा जैसी फिल्मों में उन्होंने सकारात्मक सहायक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन सुभाष घई ने अपने निर्देशन में बनने वाली पहली फिल्म कालीचरण में उन्हें रीना रॉय के अपोजिट नायक बना दिया, क्योंकि उस समय कई अभिनेता रीना रॉय के साथ काम करने से इनकार कर चुके थे। नायक के रूप में भी शत्रुघ्न सिन्हा को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उन्होंने अपने इंस्टीट्यूट बैच की जया के साथ बतौर नायक फिल्म गाय और गौरी भी की। यह भी एक दिलचस्प इत्तेफाक है कि आज जहां जया राज्यसभा की सदस्य हैं, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा लोकसभा के सदस्य हैं।
