एड. कनई बिस्वास
भारतीय न्याय संहिता, २०२३ केवल सामान्य अपराधों से ही नहीं, बल्कि मानव गरिमा और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों से भी कठोरता से निपटती है। किसी व्यक्ति को दास बनाकर उसका व्यापार करना, किसी से उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन काम कराना तथा भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ना या ऐसा करने के लिए उकसाना अत्यंत गंभीर अपराध हैं। धारा १४५, १४६ और १४७ इन्हीं अपराधों के लिए दंड का प्रावधान करती हैं।
केस स्टडी- १: ‘दासों के व्यापार का अभ्यस्त होना’ (धारा १४५) एक गिरोह गरीब परिवारों के बच्चों और महिलाओं को रोजगार का झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाता था। वहां उन्हें बेच दिया जाता और उनकी खरीद-फरोख्त से लगातार मुनाफा कमाया जाता था। जांच में सामने आया कि यह गिरोह लंबे समय से मानवों की खरीद-बिक्री के संगठित धंधे में लगा हुआ था।
अदालत क्या देखेगी?
क्या आरोपी लगातार मानवों की खरीद-बिक्री के कारोबार में शामिल था? क्या यह कार्य आर्थिक लाभ के उद्देश्य से किया जा रहा था? क्या पर्याप्त साक्ष्य आरोपी की नियमित संलिप्तता सिद्ध करते हैं?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी दासों के व्यापार का अभ्यस्त था तो उसके विरुद्ध धारा १४५ के तहत कठोर दंड दिया जाएगा।
समझें: धारा १४५ का उद्देश्य मानवों की खरीद-बिक्री जैसे अमानवीय अपराधों पर पूर्ण रोक लगाना है। किसी भी व्यक्ति को वस्तु की तरह खरीदना या बेचना कानून की दृष्टि में अत्यंत गंभीर अपराध है।
केस स्टडी- २: ‘अवैध रूप से जबरन श्रम कराना’ (धारा १४६) एक ईंट-भट्ठा संचालक ने मजदूरों के पहचान-पत्र अपने पास रख लिए और उन्हें धमकी देकर बिना उचित मजदूरी के लगातार काम करने के लिए मजबूर किया। मजदूरों को परिसर छोड़ने की भी अनुमति नहीं थी।
अदालत क्या देखेगी?
क्या मजदूरों से उनकी इच्छा के विरुद्ध काम कराया गया?
क्या उन पर दबाव, धमकी या अवैध नियंत्रण रखा गया?
क्या श्रम कराने का कोई वैध कानूनी आधार था?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने किसी व्यक्ति से अवैध रूप से जबरन श्रम कराया, तो उसके विरुद्ध धारा १४६ के तहत कार्रवाई की जाएगी।
समझें: धारा १४६ प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा करती है। किसी से उसकी इच्छा के विरुद्ध या अवैध दबाव डालकर काम कराना दंडनीय अपराध है।
केस स्टडी- ३: ‘भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ना, युद्ध छेड़ने का प्रयास करना या उसके लिए उकसाना’ (धारा १४७)
कुछ लोगों ने हथियार इकट्ठे कर सरकारी प्रतिष्ठानों पर सशस्त्र हमला करने और भारत सरकार के विरुद्ध हिंसक कार्रवाई की योजना बनाई। जांच एजेंसियों ने समय रहते षड्यंत्र का खुलासा कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत क्या देखेगी?
क्या भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ने या उसका प्रयास करने की योजना थी? क्या आरोपी ने हथियार, संसाधन या अन्य तैयारी की थी? क्या आरोपी ने स्वयं भाग लिया या दूसरों को इसके लिए उकसाया अथवा सहायता की?
फैसला- यदि यह सिद्ध हो जाता है कि आरोपी ने भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध छेड़ा, उसका प्रयास किया या उसके लिए उकसाया, तो उसके विरुद्ध धारा १४७ के तहत अत्यंत कठोर दंड दिया जाएगा।
समझें: धारा १४७ भारत की संप्रभुता, एकता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए बनाई गई है। भारत सरकार के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह, युद्ध या उसके लिए उकसाना भारतीय न्याय संहिता के सबसे गंभीर अपराधों में से एक है। भारतीय न्याय संहिता यह स्पष्ट करती है कि प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता और देश की सुरक्षा सर्वोच्च है। मानवों की खरीद-बिक्री, जबरन श्रम और राष्ट्र के विरुद्ध युद्ध जैसी गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के मूल ढांचे पर भी सीधा आघात करती हैं। इसलिए इन अपराधों के लिए कानून में अत्यंत कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
(अगले अंक में: धारा १४८, १४९ और १५०- भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध की साजिश, युद्ध संबंधी तैयारी को छिपाना तथा भारत के मित्र राष्ट्रों के विरुद्ध युद्ध से जुड़े अपराधों को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझेंगे।)
