अरुण कुमार गुप्ता
हाल ही में नीति आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें पिछले १० साल में देशभर में ९४ हजार सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। इन आंकड़ों को देखकर क्या आपका सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा। ९४,००० स्कूलों को बंद करने का मतलब है, हमारे देश के सिस्टम ने औसतन हर दिन २५ स्कूलों पर ताला लगाया है। वर्ष २०१५ में जहां देश में ११ लाख ७,००० सरकारी स्कूल थे, वहीं आज १० लाख १३,००० पर आ गए हैं। वैसे भी कहा जाए तो मुफ्त की सरकारी स्कूलों में शिक्षा में वह बात कहां है, जो प्राइवेट स्कूलों की भारी-भरकम फीस और डोनेशन में है। संभवत: इसी कारण देशभर में प्राइवेट स्कूलों की संख्या २,८८,००० से छलांग लगाकर ३,३९,००० पर पहुंच गई है। सिर्फ सरकारी स्कूल ही कम नहीं हुए हैं, बल्कि स्कूलों में पढ़नेवाले बच्चों की संख्या भी कम हुई है। पिछले १० सालों में करीब सवा दो करोड़ बच्चों ने स्कूल की दहलीज लांघना बंद कर दिया है। अब सरकार की सोच देखिए जितने कम बच्चे पढ़ेंगे, उतने कम लोग नौकरियां मांगेंगे और बेरोजगारी की समस्या खुद-ब-खुद सुलझ जाएगी। वैसे भी पांचवीं की बाद नौवीं-दसवीं तक पहुंचते पहुंचते करीब ११ प्रतिशत बच्चे पढ़ाई को अलविदा कर देते हैं। नीति आयोग का आंकड़ा तो यही कह रहा है कि निकट भविष्य में ना तो स्कूल होंगे ना पढ़ाई का झंझट और न ही बेरोजगारी का झंझट। इसलिए मोदी सरकार के नारे के अनुरूप आत्मनिर्भर बनना है तो स्कूल छोड़ना है। सरकार पर भरोसा करेंगे तो कुछ नहीं होने वाला है।
विरोधियों का गला घोटना ही हमारा काम!
नरेंद्र मोदी की सरकार में देश किस दिशा में जा रहा है, यह देशवासियों के सामने धीरे-धीरे सामने आ रहा है। २०१४ में जिस ताम-झाम से मोदी सरकार सत्ता में आई थी, उससे बहुत उम्मीदें थी, लेकिन आज यह सिर्फ सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर विरोधी पार्टियों को तोड़ने, देश को लूटनेवालों को बचाने और उद्योगपतियों को बढ़ावा देने में जुटी हुई है। मकसद सिर्फ एक है कुछ भी करो सत्ता में बने रहो और मलाई खाते रहो। देश की जनता भाड़ में जाए। इससे कोई मतलब नहीं। उद्योगपति मित्रों को दिए गए ५,४४,००० करोड़ कर्ज में से मात्र १,६०,००० करोड़ कर्ज वसूल किया गया। बाकी सब माफ कर दिए गए। क्या यही बात किसानों के साथ लागू हुई। मोदी सरकार में ९,००० करोड़ रुपए विजय माल्या लेकर भाग गया। ३०,००० करोड़ लेकर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी भाग गए। ६,००० करोड़ लेकर नितिन सरदेशरा ढाई हजार करोड रुपए लेकर ललित मोदी भाग गया। इतने बड़े-बड़े लुटेरे को किसने भगाया। किसकी सरकार में भागे। क्या इसी तरह देश की अर्थव्यवस्था ठीक होगी। यहां एक बात और याद दिला दें कि मोदी सरकार मैं सिर्फ उद्योगपति अडानी को बढ़ावा मिला है। २०१५ में नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश की यात्रा की, वहां अडानी को बिजली का ठेका मिला। २०२१ में श्रीलंका की यात्रा की, श्रीलंका के पोर्ट का ठेका अदानी को मिल गया। ऐसे तमाम उदाहरण हैं। मोदी जी ने जहां-जहां विदेश यात्राएं कीं। जिन-जिन देशों की यात्रा की। वहां पर अडानी को ठेके मिले हैं। इससे साफ है कि मोदी जी सिर्फ उद्योगपति मित्रों के लिए ही काम कर रहे हैं। देश की जनता भगवान भरोसे छोड़ दिए है। देश की जनता के लिए तो राम है ही न, लेकिन इन लोगों ने तो राम को भी नहीं छोडा। राम को भी लूट लिया। बाकी सब चंगा है।
