मुंबई महानगरपालिका में ढोल-नगाड़े बजाकर सत्ता में बैठी भाजपाइयों की पोल पहली ही बारिश ने खोल दी थी। अब इस बारिश में हुए हादसों पर की गई कार्रवाई के ड्रामे ने भी इन लोगों का नकाब उतार दिया है। चेंबूर में बीती ३० जून को एक पेड़ स्कूली बस पर गिर गया, जिससे एक मासूम बच्चे को अपनी जान गंवानी पड़ी। इस दर्दनाक हादसे की जांच करनेवाली कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में नगरपालिका के संबंधित विभागों और अधिकारियों को साफ-साफ ‘क्लीन चिट’ दे दी। साथ ही, ठेकेदार और सलाहकार पर मिलाकर महज सात लाख रुपए का मामूली जुर्माना लगाने की सिफारिश की। जब इस पर हंगामा मचा, तब जाकर मुंबई की मेयर साहिबा की नींद खुली। अब वे इस बात का ढोंग कर रही हैं कि उन्हें यह रिपोर्ट मंजूर नहीं है। मुंबई में इस साल मानसून के दौरान पेड़ गिरने के अनगिनत हादसे हुए। आरोप लगे कि इन हादसों की मुख्य वजह सड़कों और फुटपाथों का धड़ल्ले से किया गया ‘कंक्रीटीकरण’ है और इन आरोपों में पूरी सच्चाई भी है। हालांकि, मुंबई महानगरपालिका के कमिश्नर ने इस वजह को सिरे से खारिज कर दिया था, जबकि भाजपा की मेयर और बाकी नेताओं ने सारा दोष इसी कंक्रीटीकरण पर मढ़ दिया था। अब चेंबूर पेड़ हादसे की जांच रिपोर्ट को लेकर भी ये लोग वैसी ही नौटंकी कर रहे हैं। कमिश्नर नियुक्त करनेवाले भी तुम ही, महानगरपालिका में सत्ता चलानेवाले भी तुम ही, चेंबूर हादसे की जांच के लिए
कमेटी बनाने वाले भी तुम ही,
और जब उस कमेटी की रिपोर्ट पर बवाल मचा तो उसे खारिज करने का नाटक करनेवाले भी तुम ही! मुंबई की जनता की आंखों में आखिर कितनी धूल झोंकोगे? असल में, विपक्ष ने इस कमेटी में शामिल कुछ सदस्यों पर पहले ही आपत्ति जताई थी। जिस अधिकारी के पास कंक्रीटीकरण की जिम्मेदारी थी, उसे ही इस जांच कमेटी में बिठा दिया गया था। ऐसी कमेटी से किसी निष्पक्ष रिपोर्ट की उम्मीद वैसे भी नहीं थी। बल्कि, ‘मनमाफिक रिपोर्ट’ हासिल करने के लिए ही यह सारा खेल रचा गया था। यही वजह है कि इस कमेटी ने गार्डन और सड़क विभाग को सीधे ‘निर्दोष’ करार दे दिया और ठेकेदार-सलाहकार पर सिर्फ सात लाख का जुर्माना ठोककर उन्हें ‘दोषमुक्त’ कर दिया। मेयर रितु तावड़े भले ही अब इस रिपोर्ट को नामंजूर करने की लीपापोती कर रही हों, लेकिन यह पूरी तरह ‘मैं मारने का नाटक करती हूं, तुम रोने का नाटक करो’ वाला मामला है। सत्ता, भ्रष्ट प्रशासन और ठेकेदारों के गठजोड़ इसी गठजोड़ के कारण मुंबई में कहीं पेड़ गिरने से मासूमों की जान जा रही है तो कहीं खुद मेयर के सामने खुले मैनहोल में लोग गिर रहे हैं। महानगरपालिका की कमिश्नर मैडम कहती हैं कि पेड़ गिरने के लिए कंक्रीटीकरण जिम्मेदार नहीं है, लेकिन मेयर मैडम का दावा है कि बढ़ते कंक्रीटीकरण की वजह से ही पेड़ उखड़ रहे हैं। कमिश्नर कहती हैं कि जिन ठेकेदारों ने
नालों की सफाई का काम
ठीक से नहीं किया और जिसकी वजह से लोगों की जानें गर्इं, उन ठेकेदारों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराओ। वहीं मेयर कहती हैं कि चेंबूर हादसे की जांच रिपोर्ट और ठेकेदार पर सिर्फ सात लाख का जुर्माना उन्हें मंजूर नहीं है, उस ठेकेदार पर मुकदमा दर्ज करो। मेयर आखिर यह दिखावा किसके लिए कर रही हैं? सिर्फ जबानी जमा-खर्च करने के बजाय दोषियों पर सीधी कार्रवाई क्यों नहीं करतीं? आपके और आपके आकाओं के हाथ कार्रवाई करते वक्त कांप क्यों रहे हैं? चेंबूर हादसे पर बेशर्मी से हंसनेवाले भाजपा के मुंबई अध्यक्ष आज नौटंकी करते हुए कह रहे हैं, ‘हम इस रिपोर्ट को कूड़ेदान में फेंकते हैं।’ मेयर साहिबा उस बदनसीब मासूम के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रही हैं और खोखले दावों के बुलबुले छोड़ रही हैं। सत्ता तुम्हारी है, सारे अधिकार तुम्हारे पास हैं; तो दर्ज करो मुकदमा और ठहराओ जिम्मेदार अधिकारियों को दोषी! आखिर कितना ढोंग करोगे? वैसे, राम मंदिर दानपेटी घोटाले पर सिर्फ ‘खेद’ जताने वाले लोग जब केंद्र में बैठे हों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले विपक्ष को ‘देख लेने’ की धमकी देने वाले मुख्यमंत्री राज्य में हों तो मुंबई महानगरपालिका की उनकी मेयर से और क्या उम्मीद की जा सकती है? केंद्र से लेकर महानगरपालिका तक, बदकिस्मती से आजकल इन्हीं बहरूपियों का राज चल रहा है।
