मुख्यपृष्ठस्तंभमुस्लिम वर्ल्ड : ईरान में पिट गया मोसाद का प्लान!

मुस्लिम वर्ल्ड : ईरान में पिट गया मोसाद का प्लान!

सूफी खान

क्या ईरान के पूर्व राष्ट्रपति खुद अपने ही देश के खिलाफ सबसे बड़ी साजिश का हिस्सा बनने वाले थे? क्या इजरायल ने सत्ता पलटने के लिए अपने सबसे पुराने दुश्मन को ही मोहरा बना लिया था और क्या एक सीक्रेट मिशन, आखिरी वक्त पर बेनकाब हो गया?
इन ३ सवालों ने आज पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों में भूचाल ला दिया है। मामला शुरू होता है न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट से।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदी नेजाद को एक ‘सत्ता परिवर्तन प्लान’ में शामिल करने की कोशिश की थी। ये कोई एक दिन की प्लानिंग नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ये खेल साल २०२२ से शुरू हुआ। उसी वक्त जब अहमदी नेजाद और ईरान की मौजूदा हुकूमत के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे। अहमदी नेजाद कई बार चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन ईरान की गार्जियन काउंसिल ने हर बार उन्हें रिजेक्ट कर दिया। बस यहीं से मोसाद की नजर उन पर पड़ी। उन्हें वैकल्पिक लीडर के तौर पर देखना शुरू कर दिया गया। कहा गया कि अहमदी नेजाद ने अपनी पूरी इमेज बदल ली। पहनावा बदला, बोलने का अंदाज बदला, और तो और अंग्रेजी तक सीखनी शुरू कर दी। ताकि वो इंटरनेशनल लेवल पर एक्सेप्टेबल बन सकें।
रिपोर्ट कहती है कि हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अहमदीने जाद की सीक्रेट मीटिंग मोसाद के अफसरों से हुई। उन्हें एक सुरक्षित ठिकाने पर ले जाकर ईरान में सत्ता पलट की रणनीति पर बात की गई। प्लान ये था कि अगर ईरान में हालात बिगड़ते हैं, तो अहमदी नेजाद को ‘नए चेहरे’ के तौर पर आगे लाया जाए। यहां तक कि दावा ये भी है कि तेहरान में एक हमले के दौरान मोसाद के नेटवर्क ने अहमदी नेजाद को सुरक्षित बाहर निकाला था। खबरें ये भी आती रही कि ईरान में आईआरजीसी ने पूर्व राष्ट्रपति अहमदी नेजाद को उनके घर पर ही नजरबंद कर दिया है। लेकिन कहानी में मोड़ यहीं आता है।
इन सब आरोपों के बीच ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के जनाजा कार्यक्रम में अहमदी नेजाद अचानक सबके सामने आ गए और हैरानी यह कि उनके चेहरे-हावभाव से जरा भी नहीं लगा कि उनके साथ ईरान में कोई ज्यादती हुई हो। जिस नेता पर देश के खिलाफ साजिश का आरोप था, उसी को ईरान ने खुलेआम मंच पर लाकर दुनिया को जवाब दे दिया। तो सवाल ये है कि क्या ये वाकई मोसाद का सबसे बड़ा सीक्रेट ऑपरेशन था जो फेल हो गया? या ये सिर्फ एक प्रोपेगेंडा है ईरान को अंदर से तोड़ने के लिए?

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