कविता श्रीवास्तव
लंदन का ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड… क्रिकेट की दुनिया का वह मैदान, जहां हर खिलाड़ी का सपना होता है कि उसका नाम सम्मान के बोर्ड पर दर्ज हो। इसी सपने को भारतीय महिला क्रिकेट की दो बेटियों ने सच कर दिखाया है। बीते रविवार को इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए महिला टेस्ट में भारत की विकेटकीपर व बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने शानदार शतक लगाकर इतिहास रच दिया। वहीं युवा गेंदबाज क्रांति गौड़ ने भी अपनी घातक गेंदबाजी से लॉर्ड्स के ‘ऑनर्स बोर्ड’ पर अपना नाम दर्ज करा लिया। आज भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम लगातार अस्थिरता और निराशाजनक प्रदर्शन से जूझ रही है। वहीं भारतीय महिला क्रिकेटरों ने अपने क्रिकेटिंग जज्बे से करोड़ों भारतीयों को गर्व का अहसास कराया है। यास्तिका भाटिया के टेस्ट करियर का पहला शतक है। यास्तिका लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट शतक लगानेवाली पहली महिला क्रिकेटर बनी हैं। लॉर्ड्स का मैदान क्रिकेट की विरासत और गौरव का प्रतीक है। यहां का प्रदर्शन हर खिलाड़ी के लिए विशेष उपलब्धि माना जाता है। इससे पहले यहां शतक जमाने वाले वीनू मांकड़ (१९५२), दिलीप वेंगसरकर (तीन बार शतक १९७९, १९८२, १९८६), रवि शास्त्री (१९९०), मोहम्मद अजहरद्दीन (१९९०), सौरव गांगुली (१९९६), अजीत आगरकर (२००२), राहुल द्रविड़ (२०११), अजिंक्य रहाणे (२०१४) और केएल राहुल (२०२१) के नाम ‘ऑनर्स बोर्ड’ पर दर्ज हैं। यहां गेंदबाजी में पांच विकेट लेना भी रिकार्ड होता है। बीते रविवार को भारत की क्रांति गौड़ ने भी पांच विकेट लेकर लॉर्ड्स के ‘ऑनर्स बोर्ड’ पर अपना नाम लिखवाया है। महज २२ साल की उम्र में उनका यह प्रदर्शन भारतीयों के लिए गर्व की बात है। भारतीय पुरुष खिलाड़ियों में कपिल देव (१९८२), वेंकटेश प्रसाद (१९९६), अजित आगरकर (२००२), इरफान पठान (२००६), प्रवीण कुमार (२०११), ईशांत शर्मा (२०१४) भुवनेश्वर कुमार (२०१४) और जसप्रीत बुमराह (२०२५) इस मैदान पर पांच विकेट लेनेवालों की सूची में नाम दर्ज करवा चुके हैं। अब हमारी महिला खिलाड़ी भी उपलब्धियों की तस्वीर बदल रही हैं। अब भारतीय महिला क्रिकेटर्स पीछे नहीं हैं। वे अपने जज्बे और अद्भुत खेल से पुरुषों से भी आगे नजर आने लगी हैं। लॉर्ड्स पर यास्तिका का शतक भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत और नई पहचान का प्रतीक है।
यह उस ‘नारी शक्ति’ का प्रदर्शन है, जिसने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित क्रिकेट मंच पर भारत का तिरंगा और ऊंचा किया है। जहां पुरुष टीम अपने प्रदर्शन को लेकर सवालों में घिरी है, वहीं महिला टीम ने अपने खेल से जवाब दिया है। लॉर्ड्स के इतिहास में अब भारतीय महिला क्रिकेट की दो बेटियों के नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो चुके हैं। एक ने गेंद से कमाल दिखाया, तो दूसरी ने बल्ले से इतिहास रच दिया। यास्तिका भाटिया और क्रांति गौड़ ने साबित कर दिया है कि भारतीय महिला क्रिकेट अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व क्रिकेट में अपनी मजबूत जगह बनाने और नई ऊंचाइयां छूने की चुनौती देता है।
