मुख्यपृष्ठनए समाचारलाखों का खर्च फिर भी बदहाल हैं मनपा के प्याऊ!

लाखों का खर्च फिर भी बदहाल हैं मनपा के प्याऊ!

– पानी की बूंद-बूंद को तरसते लोग

-उद्घाटन के बाद गायब हुआ पानी!

संदीप पांडेय / मुंबई

एक ओर मुंबई भीषण गर्मी की चपेट में है और दूसरी ओर आम लोगों को राहत देने के लिए बनाए गए मनपा के प्याऊ खुद बदहाली का शिकार हो गए हैं। लाखों रुपए खर्च कर जिन प्याऊ का जीर्णोद्धार किया गया था, वे आज पानी की एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। नतीजा यह है कि जनता का पैसा तो खर्च हो गया, लेकिन जनता को उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
दादर के गोखले रोड स्थित आशीष इंडस्ट्रीयल इस्टेट के पास वर्ष २०२४ में मनपा ने १९२९ में बने ऐतिहासिक प्याऊ का जीर्णोद्धार कर बड़े तामझाम के साथ उद्घाटन किया था। दावा किया गया था कि राहगीरों और स्थानीय लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। मगर उद्घाटन के महज दो साल के भीतर ही इस प्याऊ का पानी बंद हो गया और अब यह केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लाखों रुपए खर्च किए गए तो रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी? यदि व्यवस्था इतनी ही कमजोर थी तो जनता के पैसे का उपयोग किसलिए किया गया? हैरानी की बात यह है कि इस मामले में मनपा के संबंधित अधिकारी भी चुप्पी साधे हुए हैं और कोई जवाब देने को तैयार नहीं है। आशीष इंडस्ट्रीयल इस्टेट में प्रतिदिन हजारों कर्मचारी काम करने आते हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र घनी आबादी वाला इलाका है, जहां दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। पहले इस प्याऊ से राहगीरों, मजदूरों और विशेष रूप से टैक्सी चालकों को राहत मिलती थी, लेकिन अब उन्हें पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। गर्मी के इस दौर में जब लोगों को सबसे ज्यादा पेयजल सुविधाओं की जरूरत है, तब मनपा की यह लापरवाही उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के दावों के बीच एक साधारण प्याऊ तक चालू नहीं रख पाना प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी को उजागर करता है। जनता पूछ रही है कि आखिर लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी अगर प्याऊ बंद ही रहना था, तो इस पूरे जीर्णोद्धार का फायदा किसे मिला?

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