मुख्यपृष्ठनमस्ते सामनादिव्य स्वरूपा नारी 

दिव्य स्वरूपा नारी 

हे नारी तुम कुसुम कुमुद हो, माथे का श्रृंगार प्रिय।
तुम ही देवी, तुम ही लक्ष्मी स्वरूपा ।

तुम घर आँगन धन धान्य प्रिय
हे नारी – तुम पतित पावनी रेवा सी जलधार प्रिये
सुरनर गाये, मुनिवर गाये सगुण हृदय की खान प्रिये
हे नारी – तुम विश्वस्वरुपा हर घर की तुम शान प्रिय,
नीवं तुम्ही हो, तुम्ही स्तम्भ हमारा, तुम हो “निधि” आधार प्रिय,
हे नारी – तुम ध्वनि संगीत ‘की वीणा की स्वर तार प्रिय तुम्ही करताल की मधुर विस्तारक,
तुम मन की झंकार प्रिय

श्रीमती निधि दीक्षित शर्मा ( कवयित्री )
इंदौर, मप्र

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