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रुख-ए-सियासत: युवाओं का भरोसा मत तोड़िए क्योंकि टूटता भरोसा लोकतंत्र की सबसे बड़ी हार है

तौसीफ कुरैशी

आज सरकारी नौकरियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच परीक्षा व्यवस्था पर सवाल युवाओं की चिंता और बढ़ाते हैं। सरकारों को समझना होगा कि युवा सिर्फ वोट बैंक नहीं, देश का भविष्य हैं। हेमंत सोरेन सरकार के पास इस संकट को अवसर में बदलने का मौका है।
झारखंड के युवाओं का गुस्सा अचानक सड़क पर नहीं आया। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, अधूरे सपने और व्यवस्था से मिले धोखे की पीड़ा है। प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी केवल एक परीक्षा का सवाल नहीं, बल्कि उन युवाओं के भविष्य का सवाल है, जिन्होंने वर्षों किताबों और उम्मीदों के सहारे बिताए हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की पहल और वरिष्ठ मंत्रियों की समिति बनाना सकारात्मक कदम है। लोकतंत्र में टकराव नहीं, संवाद सबसे मजबूत रास्ता है। सरकारें बहुमत से बनती हैं, लेकिन भरोसे से चलती हैं।
व्झ्एण् परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और रिश्वतखोरी के आरोपों ने हजारों अभ्यर्थियों के मन में संदेह पैदा किया है। ण्घ्D जांच और गिरफ्तारियों के बावजूद सवाल कायम है कि क्या पूरी सच्चाई सामने आएगी? क्या प्रभावशाली लोगों तक भी जांच पहुंचेगी? छात्रों का जांच एजेंसियों पर अविश्वास बताता है कि असली संकट भरोसे का है। सरकार को जांच की समयसीमा तय करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कार्रवाई करनी चाहिए। युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, निष्पक्षता का भरोसा चाहिए।
आज सरकारी नौकरियों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच परीक्षा व्यवस्था पर सवाल युवाओं की चिंता और बढ़ाते हैं। सरकारों को समझना होगा कि युवा सिर्फ वोट बैंक नहीं, देश का भविष्य हैं। हेमंत सोरेन सरकार के पास इस संकट को अवसर में बदलने का मौका है। संवाद शुरू हुआ है, अब उसे न्याय तक पहुंचाना होगा। लोकतंत्र की असली जीत आंदोलन दबाने में नहीं, बल्कि युवाओं को यह विश्वास दिलाने में है कि उनकी आवाज सुनी गई। युवाओं का भरोसा बचाना सरकार की मजबूरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
सत्यमेव जयते।

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