अमेरिका के सनकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिन-ब-दिन बदनाम होते जा रहे हैं। उनके अजीब व्यवहार, बेतुकी बातों और ऊटपटांग कार्रवाइयों के कारण न केवल उनकी वैश्विक छवि धूमिल हो रही है, बल्कि अमेरिका में भी उनके प्रति असंतोष बढ़ता जा रहा है। हालांकि, जिस तरह एक नशे में धुत तानाशाह अपनी मस्ती में एक के बाद एक गलतियां करता जाता है, उसी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के सभी कदम टेढ़े-मेढ़े ही पड़ रहे हैं। वेनेजुएला पर अचानक हमला कर राष्ट्रपति ट्रंप के कमांडो ने वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उठा लिया और सीधे अमेरिका ले आए। आखिर अमेरिका को किसी देश के राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार करने और ले जाने का लाइसेंस किसने दिया? शुक्रवार को आधी रात के बाद, १५० अमेरिकी विमान अचानक वेनेजुएला में घुसते हैं। राजधानी काराकास की बिजली पहले काट दी जाती है, ताकि वहां के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय किया जा सके। अमेरिकी लड़ाकू विमानों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोनों ने बिना किसी प्रतिरोध के आठ महत्वपूर्ण स्थानों पर भीषण हमला करते हैं। अमेरिकी डेल्टा फोर्स के कमांडो राष्ट्रपति मादुरो के आवास पर पहुंचते हैं और वे एक सुरक्षित लोहे के तहखाने में दाखिल होते हैं और मादुरो की कलाई पकड़कर उन्हें गिरफ्तार कर लेते हैं। उन्हें हथकड़ी पहनाकर अमेरिका लाया जाता है। ‘एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ नामक इस रोमांचक ऑपरेशन को अमेरिकी सेना महज आधे घंटे में पूरा कर लेती है। अमेरिका की इस अचानक कार्रवाई ने पूरी दुनिया में सनसनी मचा दी। दुनियाभर के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति स्तब्ध रह गए। हालांकि, रूस और चीन को छोड़कर किसी भी देश ने अमेरिका की इस
कार्रवाई पर सरल विरोध
तक नहीं दर्ज किया। हिंदुस्थान ने चिंता व्यक्त करते हुए एक पर्चा जारी किया है; लेकिन उसमें अमेरिका का कहीं जिक्र तक नहीं है। देशवासी सोच रहे हैं कि उनके ५६ इंच के शासक राष्ट्रपति ट्रंप को मुंहतोड़ जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं, जो पाकिस्तान को सहयोगी बताकर लगातार भारत की आलोचना करते हैं। ट्रंप ने हाल ही में एक चौंकाने वाला बयान दिया, ‘वे जानते हैं कि मैं प्रधानमंत्री मोदी से नाराज हूं। इसीलिए मोदी मुझे खुश करने की कोशिश कर रहे हैं और मुझे खुश करने के लिए उन्होंने रूस से तेल की खरीद कम कर दी है।’ राष्ट्रपति ट्रंप का यह बयान न केवल मोदी का, बल्कि पूरे हिंदुस्थान का अपमान है। फिर भी, सवाल यह है कि शासक इस अपमान को चुपचाप क्यों सह रहे हैं और क्या इसके पीछे कोई रहस्य है? वेनेजुएला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए अमेरिका द्वारा दिए गए कारण सरासर हास्यास्पद हैं। अमेरिका ने मादुरो पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी का आरोप लगाया है। अगर वेनेजुएला से अमेरिका में बड़ी मात्रा में ड्रग्स आ रही हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘सुपरपावर’ की सीमाएं बहुत कमजोर हैं। यह कारण बिलकुल नहीं है। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन करना और उसके विशाल तेल भंडार और खनिज संपदा को लूटना है। इराक में भी, अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को झूठे आरोपों में फांसी दे दी और वहां के तेल के कुओं पर कब्जा कर लिया। अमेरिका दशकों से मनमाने ढंग से हमला करके एक संप्रभु देश को नष्ट करने की कोशिश करता रहा है। हालांकि, महाशक्ति
अमेरिका से संबंध क्यों बिगाड़े
जाएं, इस भूमिका के चलते अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस अत्याचार के खिलाफ हमेशा चुप रहा है। इस रवैये के साथ कि पूरी दुनिया हमसे डरती है, इसलिए अगर हम किसी देश को नुकसान पहुंचाते हैं तो हमसे सवाल कौन करेगा? इस पर चुप्पी ने अमेरिका के विश्वास को और मजबूत किया है। अमेरिका ने वेनेजुएला पर बलपूर्वक हमला किया और उसके राष्ट्रपति का अपहरण कर लिया। यह आश्चर्य की बात है कि विश्व समुदाय इस बात से अनजान है कि कल किसी अन्य देश के साथ भी ऐसी ही स्थिति हो सकती है। यह स्पष्ट है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नजर रखते हुए राष्ट्रपति मादुरो का अपहरण किया। हालांकि, यह तर्क भी दिया जाता है कि मादुरो ने धांधली और वोट चोरी के जरिए सत्ता हासिल की, इसलिए अमेरिका ने लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया। सच्चाई सिर्फ वेनेजुएला के लोग जानते हैं। लेकिन वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के बाद वहां के लोग विद्रोह क्यों नहीं कर पाए? यह भी एक सवाल है! लेकिन दुनिया को किसी भी संप्रभु देश पर हमला करने और अपनी पसंद के शासक को सत्ता में बिठाने के लिए अमेरिका की दादागीरी को क्यों सहन करना चाहिए? अमेरिका ने आज वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो का अपहरण कर लिया; अगर अमेरिका कल किसी भी देश के अवांछित नेता को उठाना शुरू कर दे तो क्या होगा? इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने के लिए कड़ी खटपट की। संयुक्त राष्ट्र को ही अब इस बात पर विचार करना चाहिए कि दुनियाभर में अशांति पैâलाने वाले इन महाशय को किस प्रकार का पुरस्कार दिया जाए!
