जेदवी / मुंबई
मुंबई। इंडिगो की उड़ानों में पिछले चार दिनों से जारी देरी और वैंâसिलेशन ने हवाई यात्रियों में हाहाकार मचा दिया है। हजारों पैसेंजर एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं और टिकट रिफंड व री-शेड्यूलिंग की अव्यवस्था ने उनकी परेशानी दोगुनी कर दी है। संकट को देखते हुए रेलवे ने मुंबई से कई एक्स्ट्रा स्पेशल ट्रेनें चलाने का ऐलान तो किया, लेकिन जमीन पर इसका लाभ यात्रियों तक पहुंचते नहीं दिख रहा। फायदा उठा रहे हैं तो सिर्फ रेलवे टिकट दलाल। इस पूरे खेल में स्थानीय टिकट काउंटर कर्मचारियों, आईआरसीटीसी एजेंटों और आरपीएफ के कुछ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
टिकटों की कालाबाजारी चरम पर हैं। यात्रियों का कहना है कि दलालों ने संकट को ‘कमाई का सीजन’ बना लिया है। असल किराए से कई गुना अधिक रकम वसूली जा रही है।
स्लीपर: असली किराया ७०० रुपए, वसूली २,८००–३,००० रुपए
एसी ३-टियर: असली किराया १,७०० रुपए, वसूली ४,२०० रुपए
एसी २-टियर: असली किराया २,७०० रुपए, वसूली ६,००० रुपए
अतिरिक्त ट्रेनें चलने के बावजूद टिकट चंद सेकंड में ‘फुल’ दिख रहे हैं, जबकि बाहर खड़े दलाल वही टिकट मोटी रकम पर बेच रहे हैं।
यात्रियों का आरोप है कि इतने बड़े स्तर की ब्लैक मार्वेâटिंग बिना ‘अंदरूनी सेटिंग’ के संभव ही नहीं है। कई यात्रियों ने दावा किया कि टिकट काउंटरों के बाहर सक्रिय दलाल और कुछ आईआरसीटीसी अधिकृत एजेंट और आरपीएफ के चुनिंदा कर्मचारी इस पूरे संकट को ‘कमाई’ का मौका बनाकर बैठ गए हैं।
यात्रियों में दहशत
एक फंसे हुए यात्री ने गुस्से में कहा कि ‘दो दिन से एयरपोर्ट पर पड़ा हूं। ट्रेन से जाने को सोचा, लेकिन यहां दलालों का साम्राज्य है। भरोसा किस पर करें?’
जांच की मांग तेज, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा
इंडिगो की अव्यवस्था और रेलवे टिकटों की खुलेआम कालाबाजारी ने यात्रियों को कठिन हालात में धकेल दिया है। सोशल मीडिया पर हजारों पोस्ट वायरल हैं, जिनमें रेल मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की जा रही है। यात्रियों की गुहार साफ है कि ‘हवाई और रेल-दोनों व्यवस्थाओं की बिगड़ी चाल से आम इंसान पिस रहा है। ठोस कार्रवाई ही राहत दे सकती है। पता नहीं सरकार की नींद कब टूटेगी?
