जेदवी / मुंबई
महाराष्ट्र में रेलवे भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने के नाम पर अब बड़े स्तर पर प्रशासनिक अभियान शुरू होने जा रहा है। राज्य सरकार के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा जारी सरकारी संकल्प के बाद रेलवे की जमीनों को आधिकारिक तौर पर ‘भारत सरकार, रेलवे’ के नाम पर दर्ज करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इस कदम से जहां रेलवे को जमीन विवादों और कानूनी मामलों में मजबूती मिलेगी, वहीं वर्षों से रेलवे जमीनों पर रह रहे लोगों और कब्जाधारकों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
मुंबई, ठाणे, पुणे और नागपुर जैसे घनी आबादी वाले शहरों में इसका सबसे बड़ा असर देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में रेलवे की जमीनों पर लंबे समय से अतिक्रमण, झोपड़ियां, व्यावसायिक उपयोग और स्वामित्व विवाद बने हुए हैं। अब रिकॉर्ड दुरुस्त होने के बाद रेलवे प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई और तेज कर सकता है।
७ मई २०२६ को जारी सरकारी संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि ग्राम प्रपत्र ७/१२, संपत्ति कार्ड, ग्राम मानचित्र और अन्य राजस्व अभिलेखों में रेलवे की जमीनों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। रेलवे की जमीनों को अलग सर्वेक्षण संख्या, गट नंबर और नगर सर्वेक्षण नंबर देकर स्वतंत्र पहचान दी जाएगी।
दरअसल, ब्रिटिश काल से मौजूद कई रेलवे ट्रैक और बाद में अधिग्रहीत जमीनों के रिकॉर्ड आज तक पूरी तरह अपडेट नहीं हो पाए थे। कई जगह रेलवे भूमि सड़क, पगडंडी या अन्य श्रेणियों में दर्ज रही, जिसका फायदा उठाकर वर्षों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और विवाद खड़े हुए।
अब राज्य सरकार ने जिला कलेक्टरों, भूमि अभिलेख विभाग और रेलवे प्रशासन के साथ मिलकर संयुक्त अभियान चलाने का पैâसला किया है। पुराने नक्शों की जांच, गुम रिकॉर्ड की तलाश और रेलवे सीमाओं का स्थायी चिन्हांकन किया जाएगा। शहरी क्षेत्रों में रेलवे स्टेशनों और संपत्तियों के लिए अलग संपत्ति कार्ड भी जारी किए जाएंगे।
इसके साथ ही साफ-सुथरे रिकॉर्ड के जरिए रेलवे भविष्य में स्टेशन पुनर्विकास, लॉजिस्टिक्स प्रोजेक्ट, लीज और व्यावसायिक योजनाओं के लिए जमीनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और मुद्रीकरण कर सकेगा।
