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सरकार की नाकामी… मेट्रो-१ की छह डिब्बों वाली ट्रेन पर कर्ज का ब्रेक!.. पांच लाख यात्रियों की बढ़ी क्षमता की उम्मीद पर फिरा पानी

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई की पहली मेट्रो लाइन पर रोजाना करीब पांच लाख यात्री सफर करते हैं। बढ़ती भीड़ से राहत देने के लिए मौजूदा चार डिब्बों वाली ट्रेनों को छह डिब्बों में बदलने और २२ अतिरिक्त डिब्बे खरीदने की योजना थी। इस काम पर करीब ३३० करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लेकिन ऑपरेटर कंपनी मुंबई मेट्रो वन प्राइवेट लिमिटेड (एमएमओपीएल) का कर्ज पुनर्गठन समझौता टूटने से यह विस्तार खटाई में पड़ गया है।
कंपनी ने जुलाई में सरकारी कंपनी नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (एनएआरसीएल) के साथ समझौता किया था।
इसके तहत एनएआरसीएल का कर्ज घटाने और दिवाला कार्यवाही से राहत का रास्ता बनना था। लेकिन दूसरे ऋणदाता आईआईएफसीएल यूके की मंजूरी नहीं मिलने पर एनएआरसीएल ने समझौता वापस ले लिया। इसके बाद आईआईएफसीएल यूके ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण में दिवाला प्रक्रिया फिर शुरू करने की अर्जी दी। एमएमओपीएल पर एनएआरसीएल का करीब २,७७१ करोड़ रुपए और आईआईएफसीएल यूके का लगभग १,७४५ करोड़ रुपए बकाया बताया गया है। फिलहाल मौजूदा मेट्रो सेवाएं प्रभावित होने की सूचना नहीं है। संकट का असर यात्रियों की क्षमता बढ़ाने वाली प्रस्तावित योजना पर पड़ सकता है। छह डिब्बों की ट्रेन में एक बार में करीब १,७९२ यात्री सफर कर सकेंगे, जबकि चार डिब्बों की क्षमता लगभग १,१७८ यात्रियों की है।

 

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