मुख्यपृष्ठग्लैमरहनीफनामा :गिरकर फिर उठे राज, यश, अमिताभ!

हनीफनामा :गिरकर फिर उठे राज, यश, अमिताभ!

-हनीफ जवेरी

बॉलीवुड में भारत भूषण, भगवान दादा, प्रदीप कुमार जैसे कई सितारे हुए, जिनका अपना एक रुतबा था। लेकिन वक्त की आंधी ने इनसे सब कुछ छीन लिया और ये फिर कभी अपना वह मुकाम हासिल नहीं कर सके। लेकिन कुछ ऐसे भी सितारे रहे, जिन्होंने सब कुछ गंवान्aो के बावजूद हार नहीं मानी और फिर से उठ खड़े हुए।
राज कपूर, अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा इस बात की मिसाल हैं, जो भारी असफलताएं झेलने के बाद फिर अपना मुकाम हासिल करने में सफल हुए और यह साबित किया कि मुश्किलें और असफलताएं कहानी का अंत नहीं होतीं। राज कपूर भारतीय फिल्म उद्योग के पहले स्टार-सन माने जाते हैं। उन्होंने बहुत कम उम्र में निर्देशन की कमान संभाली और ‘आग’, ‘आवारा’, ‘श्री ४२०’, ‘जिस देश में गंगा बहती है’, ‘संगम’ जैसी सफल फिल्में बनार्इं। उन्होंने अपना खुद का आर.के. स्टूडियो भी खड़ा किया। लेकिन उनकी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ की असफलता ने उन्हें आर्थिक संकट में डाल दिया। हालात इतने खराब हो गए कि उनकी पत्नी कृष्णा राज के जेवर तक बेचने पड़े और आर.के. स्टूडियो का एक हिस्सा बैंक के पास गिरवी रखना पड़ा। अगली फिल्म के लिए कोई भी उन्हें पैसा देने को तैयार नहीं था। इन मुश्किल हालात में राज शराब में डूबने लगे। इसी दौर में स्मगलर हाजी मस्तान द्वारा उनकी अगली फिल्म ‘बॉबी’ में पैसा लगाने की बात कही जाती है। ‘बॉबी’ की सफलता ने न केवल राज को आर्थिक संकट से उबरने में मदद की, बल्कि उनके बेटे ऋषि कपूर को भी एक अभिनेता के रूप में स्थापित कर दिया।
इस फिल्म के साथ राज कपूर ने एक बार फिर अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा हासिल की। बी.आर. चोपड़ा के छोटे भाई यश चोपड़ा ने बी.आर. फिल्म्स के बैनर तले ‘धूल का फूल’, ‘वक्त’, ‘इत्तेफाक’, ‘आदमी और इंसान’ जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन कर अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। लेकिन भाई बी.आर. चोपड़ा के साथ मनमुटाव के चलते उन्हें उनसे अलग होना पड़ा। इस स्थिति में उनके सामने आर्थिक और व्यावसायिक संकट खड़ा हो गया और ऐसा लगा मानो उनके पास दोबारा शुरुआत करने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। लेकिन यश ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने दम पर यशराज फिल्म्स की स्थापना की और अपनी पहली फिल्म ‘दाग’ शुरू की। फिल्म के निर्माण के दौरान वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए। ऐसे मुश्किल समय में फिल्म के नायक राजेश खन्ना ने उनकी मदद की और यश ‘दाग’ को पूरा करने में सफल रहे। आर्थिक संकट से उबरने और अपने बैनर को मजबूत आधार देने के लिए यश ने निर्माता गुलशन राय के लिए ‘जोशीला’, ‘दीवार’ और ‘त्रिशूल’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इन फिल्मों की सफलता ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया और हिंदी सिनेमा में अपना खोया हुआ मुकाम फिर से हासिल करने में मदद की।
मेगास्टार अमिताभ बच्चन ने अपने जीवन की सबसे बड़ी भूलों में से एक तब की, जब उन्होंने अपनी कंपनी एबीसीएल की स्थापना की। कंपनी की असफलता ने उन्हें गंभीर आर्थिक संकट में डाल दिया और वे भारी कर्ज में डूब गए। उस दौर में काम की तलाश में वे स्वयं यश चोपड़ा के पास गए। यश ने उन्हें अपनी फिल्म ‘मोहब्बतें’ में काम करने का अवसर दिया। उन्होंने अपने जीवन में जो पैसा और अपना बनाया हुआ मुकाम खो दिया था, उसे दोबारा हासिल करना आसान नहीं था। लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया। इसी दौरान उन्हें टेलीविजन के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी का अवसर मिला, जिसका प्रसारण पहली बार ३ जुलाई २००० को हुआ था। धीरे-धीरे यह कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय हुआ और अमिताभ भी एक बार फिर सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचने में कामयाब रहे।

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