खुशी

कोई गम मेरे पास तो आया होगा।
हंसते चेहरे को उसने रुलाया होगा।।
लिया होगा बोसा खुशी की सबा ने जब।
गीत तितलियों ने मिलन का गाया होगा।।
मुक़म्मल हुई होगी कोई गजल मुहब्बत की।
जब किसी हीर ने रांझे से दिल लगाया होगा।।
स्याह रात हुई होगी रोशन इक पल में।
मेरा किस्सा जुगनुओं ने जब सुनाया होगा।।
किसी रोज रू-बरू था जब कजा के वासिफ।
मां की दुआओं ने मुझे फिर बचाया होगा।।
-डॉ. वासिफ काजी, इंदौर

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