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भगवान के दर्शन कीजिए, सकुशल वापस लौटिए!

-भायंदर स्टेशन परिसर में मंदिर निर्माण बना चर्चा का विषय

-स्टेशन सुपरिटेंडेंट भारती राजवीर ने मंदिर निर्माण के बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने यह जरूर बताया कि मौजूदा योजना में केवल एक नया शौचालय प्रस्तावित है। शौचालय और एस्केलेटर की संख्या कम होने पर उन्होंने जगह की कमी का हवाला दिया। शौचालयों की बदहाली की तस्वीरें दिखाए जाने पर उन्होंने संबंधित विभाग से आवश्यक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया।

जेदवी / मुंबई

रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड, पश्चिम रेल प्रशासन विरार लोकल ट्रेन यात्रियों का सफर सुगम का सिर्फ दावा ही करता रह गया, लेकिन लोगों की यात्रा सुगम नहीं हुई। इस बीच भायंदर स्टेशन के रेलकर्मियों ने एक नई सोच के साथ ही नई तरकीब भी निकाली। वह तरकीब है मंदिर की। ताकि लोग यात्रा करने से पहले भगवान का दर्शन करें और सही सलामत घर वापस लौटें। क्योंकि विरार लोकल में सफर करना, मतलब वापस लौटने की कोई गारंटी नहीं है। कभी भारी भीड़ में अंदर घुसने का मौका नहीं मिला तो गेट पर लटक कर सफर करना है और नीचे गिरकर कभी भी जान से हाथ धो लेना है।
बता दें कि आए दिन रेल हादसे होते रहते हैं। दर्जनों लोग अपनी जान गंवाते हैं, लेकिन भायंदर स्टेशन के रेल कर्मियों ने इस समस्या के निराकरण के लिए भायंदर स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक ६ के दक्षिणी छोर पर मंदिर का निर्माण शुरू कर दिया है ताकि सफर करने से पहले भेड़ बकरियों की तरह लोकल ट्रेनों में घुसकर सफर करने से पहले लोग भगवान का आशीर्वाद लें और सही सलामत अपने घर वापस लौटें। यहां यह भी बता देना जरूरी है कि इस मंदिर निर्माण के बारे में कोई रेल अधिकारी या कर्मचारी कुछ भी बोलने से कतरा रहा है कि मंदिर किसकी अनुमति से बन रहा है। किसी को पता नहीं है।
शौचालय के लिए भी परेशान होते हैं यात्री
दूसरा सवाल यहां यह उठता है कि ६ प्लेटफार्म वाले भायंदर स्टेशन पर प्लेटफार्म क्रमांक एक और दो के सुदूर दक्षिणी छोर पर एकमात्र शौचालय है। वह काफी दूर होने की वजह से वहां जाने से भी यात्री कतराते हैं। इसके अलावा प्लेटफार्म क्रमांक ६ के उत्तरी छोर पर काफी दूर विरार की तरफ बनाया गया शौचालय भी ऐसी स्थिति में है कि लोग वहां भी जाना नहीं चाहते हैं। नतीजतन लोग जहां जगह खाली मिलती है वहीं शौच के लिए विवश होते हैं।
ऐन मौके पर बदल दिए जाते हैं ट्रेनों के प्लेटफार्म
एक आंकड़े के मुताबिक, भायंदर स्टेशन से करीब पौने दो लाख यात्री रोजाना आवागमन करते हैं, लेकिन सुविधा का केवल डंका पीटा जा रहा है। रेल अधिकारी मस्त हैं, यात्री पस्त हैं। कभी लोकल ट्रेनों का प्लेटफार्म बदल दिया जाता है तो कभी गलत सूचना की घोषणा की जाती है, जिससे रेल यात्री अलग से परेशान होते हैं, जवाबदेही एक-दूसरे पर धकेली जाती है।

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