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सठिया गइल का…! सुप्रीम कोर्ट मांग रहा जवाब,…स्मृति मैडम ले आईं भूतनाथ!

-ई चुनावी जांच बा कि फिल्मी तमाशा?
– अनिल तिवारी
भैया, राजनीति में अब सबूतों का नया जमाना आ गया है! पहले नेता दस्तावेज दिखाते थे, आंकड़े गिनाते थे, अब एआई से फिल्म बनाकर विरोधियों को समझाने लगे हैं! भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने गुरुवार को भूतनाथ रिटर्न्स का एआई से संपादित वीडियो साझा किया। उसमें बोमन ईरानी की जगह राहुल गांधी का चेहरा लगा दिया गया! फिल्म में अमिताभ बच्चन का भूत शिकायत करता है कि मरने के बाद भी उसका नाम मतदाता सूची में बना रहा और उसके नाम पर वोट डाल दिया गया!
वाह मैडम, वाह! चुनाव आयोग का मामला और सफाई देने पहुंच रहे भाजपा के ‘भूतनाथ!’
हालांकि, असली कमाल तो गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुआ। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्ष की याचिका पर अदालत ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। विपक्ष स्वतंत्र जांच और मतदाताओं के नाम हटाने संबंधी रिकॉर्ड की पड़ताल चाहता है। अदालत ने अभी आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। फिर भी टीम ‘भूतनाथ’ देशभर में आंदोलनकारियों को हर तरह से डरा रही है, उन पर तरह-तरह के आरोप लगा रही है और जिस चुनाव आयुक्त को जवाब देना है, वो खुद भूत की तरह गायब है। है न कमाल का किस्सा!
अरे मैडम, मरे हुए मतदाता का नाम हटाना बिल्कुल जरूरी है। मगर जिंदा मतदाता का नाम ‘मारकर’ उसे ‘भूत’ बनाने के बाद ‘तुलसी’ पत्र खिलाकर भी उसे मताधिकार का अधिकार नहीं मिल सकता है ना? उसकी सुनवाई भी जरूरी है कि नहीं?
स्मृति मैडम ने वीडियो के साथ राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। ठीक है, आरोप लगाइए! मगर कुछ तो नैतिकता रखिए, फिल्मी संवाद के साथ कभी जनसंवाद भी कर लीजिए। गजबे उलटबांसी बा! चुनावी विवाद में जनता ज्ञानेश बाबू की फाइलें मांग रही है, बदले में मैडम जनता को ‘भूतनाथ’ दिखा रही हैं!
अब बताइए भिया, मतदाता सूची की सच्चाई चुनाव आयोग के रिकॉर्ड से निकलेगी या भूतनाथ के डायलॉग से? ई सियासत सठिया गइल का… कि अब चुनावी हिसाब-किताब भी भूतों के भरोसे हो गइल बा?

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