मुख्यपृष्ठस्तंभसठिया गइल का...!.हम दो, हमारे पांच... पालन जनता करे!

सठिया गइल का…!.हम दो, हमारे पांच… पालन जनता करे!

खरगोन-बड़वानी के भाजपा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने जनसंख्या का नया मंत्र दिया है—‘हम दो, हमारे पांच।’ हिंदू परिवार पांच बच्चे पैदा करें, युवा समय पर शादी करें, जिम छोड़कर अखाड़े जाएं और नशे से दूर रहें। सलाह पूरी है शादी की उम्र तय, बच्चों की संख्या तय और कसरत की जगह भी तय। बस पांच बच्चों की पढ़ाई, दवाई, पोषण, मकान और रोजगार कौन जुटाएगा, इसका कॉलम खाली छोड़ दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर सांसद महोदय के दो पुत्र और कोई पुत्री नहीं दर्ज हैं। यानी नारा पांच का, योगदान दो का! महंगाई बढ़े तो परिवार खर्च घटाए। स्कूल की फीस बढ़े तो अभिभावक बचत करे। नौकरी न मिले तो युवा कौशल बढ़ाए। लेकिन जनसंख्या का संतुलन साधना हो तो सांसद कहेंगे पांच बच्चे पैदा करो! और फिर उन्हें अखाड़े भेजो। शायद पांच बच्चों के राशन, फीस और अस्पताल के बिल देखने के बाद पिता को पहलवान जैसी ताकत की जरूरत पड़े! सांसद ने नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन की बात भी कही, जो अपने आप में अच्छी सलाह है। मगर स्वस्थ समाज केवल संख्या बढ़ाने से नहीं बनता। शिक्षा, रोजगार, महिला स्वास्थ्य, पोषण और सम्मान भी उतने ही जरूरी हैं। सठिया गइल का…! नेता नारा देंगे, परिवार बच्चे पालेगा, सरकार आंकड़े गिनेगी और बेरोजगारी पूछने पर शायद जवाब मिलेगा पहले अखाड़े में दो दंड लगाकर आइए!
पार्टी अपनी, प्रत्याशी पराया, छोटे सरकार सबसे ऊपर!
बिहार में पार्टी अनुशासन का नया अध्याय खुला है। जदयू विधायक अनंत सिंह अपनी ही पार्टी के विधान परिषद प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ उतर गए और जन सुराज समर्थित अनुज सिंह के समर्थन में रोड शो निकाल दिया। जुलूस पटना से नवादा की ओर बढ़ा और समर्थक ‘छोटे सरकार जिंदाबाद’ के नारे लगाते रहे। कार्यकर्ता असमंजस में हैं तीर का बटन दबाएं, अनुज का प्रचार करें या छोटे सरकार की दिशा देखें? अनंत सिंह का कहना है कि जनता मालिक है और वह अनुज सिंह के लिए आशीर्वाद मांगने निकले हैं। पार्टी पीछे हटने को कहे तो भी वह पीछे नहीं हटेंगे। यानी जदयू ने उम्मीदवार घोषित किया, लेकिन विधायक ने अपनी अलग चुनावी पटकथा लिख दी। उधर, जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार ने पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार से मुलाकात की। शायद पूछने गए हों—‘हम उम्मीदवार हैं तो हमारे ही विधायक विपक्षी प्रत्याशी की गाड़ी पर क्यों हैं?’ बिहार में गठबंधन चुनाव के बाद बदलते थे। अब सुविधा बढ़ गई है नेता पार्टी में रहते हुए प्रत्याशी बदल सकता है! सदस्यता जदयू की, प्रचार जन सुराज का और नारे छोटे सरकार के! यह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता है या पार्टी अनुशासन की छुट्टी इसका फैसला पार्टी करे। मगर मतदाता के सामने पहेली जरूर खड़ी हो गई है। सठिया गइल का…! पार्टी कहती है नीरज को जिताइए, विधायक कहते हैं अनुज को जिताइए। मतदाता पूछ रहा है पहले आपस में तय कर लीजिए, हम वोट डालने बाद में आएंगे!

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